अमेरिका ने ईरान के खिलाफ 'शक्तिशाली' हवाई हमले शुरू किए हैं, यह कार्रवाई अमेरिकी बलों पर ईरान समर्थित मिलिशिया के हमले के प्रयास के ठीक एक दिन बाद की गई है। पेंटागन के अनुसार, ये हमले ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और उससे जुड़े ठिकानों पर केंद्रित थे, जिनका उपयोग क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों और सहयोगियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि ईरान या उसके प्रतिनिधि अमेरिकी हितों पर हमला करते हैं, तो अमेरिका 'बहुत जोर से' जवाब देगा। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने बताया कि शनिवार रात को शुरू किए गए इन हमलों में दर्जनों आईआरजीसी ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें मिसाइल भंडारण सुविधाएं, ड्रोन संचालन केंद्र और कमांड-एंड-कंट्रोल नोड्स शामिल हैं। ये हमले ईरान के पश्चिमी और दक्षिणी प्रांतों में किए गए, जहां आईआरजीसी की गतिविधियां सबसे अधिक सक्रिय हैं। पेंटागन के प्रवक्ता ने इसे 'आनुपातिक और सटीक' कार्रवाई बताया, जिसका उद्देश्य भविष्य के हमलों को रोकना और अमेरिकी कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ईरान की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन ईरानी राज्य मीडिया ने हमलों की पुष्टि करते हुए 'गंभीर परिणाम' की चेतावनी दी है। क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इस ताजा टकराव से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है, जहां पहले से ही गाजा युद्ध, लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ संघर्ष और लाल सागर में हूती हमलों के कारण स्थिति अस्थिर है। संयुक्त राष्ट्र और कई यूरोपीय देशों ने संयम बरतने और तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों का आह्वान किया है। यह घटनाक्रम जॉर्डन में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमले के बाद सामने आया है, जिसमें तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए थे और दर्जनों घायल हुए थे। अमेरिका ने इस हमले के लिए ईरान समर्थित कताइब हिजबुल्लाह को जिम्मेदार ठहराया था। तब से, अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है और अपने सहयोगियों के साथ समन्वय तेज कर दिया है। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय छद्म नेटवर्क को लेकर 'अधिकतम दबाव' की नीति जारी रखेगा। जानकारों का कहना है कि ये हमले अमेरिका की प्रतिरोधक क्षमता प्रदर्शित करते हैं, लेकिन साथ ही ये एक बड़े संघर्ष की ओर भी इशारा करते हैं जिसे कोई भी पक्ष नहीं चाहता। ईरान की प्रतिक्रिया अगले कुछ दिनों में क्षेत्र की दिशा तय करेगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है और सभी पक्षों से संयम बरतने तथा बातचीत के रास्ते तलाशने का आग्रह कर रहा है।