अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर ताजा हवाई हमले शुरू कर दिए हैं, जिसके बाद पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'बहुत सख्ती से प्रहार' करने की चेतावनी के चंद घंटों बाद ही अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया। यह कार्रवाई ईरान द्वारा जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर किए गए अचानक मिसाइल हमले के जवाब में की गई है, जिसमें चार आईआरजीसी सदस्यों के मारे जाने की खबर है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के सीमावर्ती इलाकों में स्थित मिसाइल लॉन्च पैड, रडार स्टेशन और कमांड सेंटरों पर सटीक हमले किए। पेंटागन के प्रवक्ता ने बताया कि ये हमले 'आत्मरक्षा' और 'निवारक' कार्रवाई के तहत किए गए हैं, ताकि ईरान की ओर से भविष्य में किसी भी आक्रामक कार्रवाई को रोका जा सके। वहीं, ईरानी सरकारी मीडिया ने हमलों की पुष्टि करते हुए कहा कि उनकी वायु रक्षा प्रणालियों ने कई अमेरिकी मिसाइलों को मार गिराया है, हालांकि नुकसान की विस्तृत जानकारी अभी नहीं दी गई है। इस घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की है। सऊदी अरब और इजराइल जैसे क्षेत्रीय सहयोगियों ने अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन किया है, जबकि रूस और चीन ने एकतरफा सैन्य कार्रवाई को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया है। ट्रंप ने अपने बयान में दोहराया कि यदि ईरान ने फिर से अमेरिकी हितों को निशाना बनाया, तो उसे 'बहुत भारी कीमत' चुकानी पड़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ताजा हमलों से पश्चिम एशिया में पूर्ण युद्ध की आशंका बढ़ गई है। तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता देखी जा रही है। अब सबकी नजरें ईरान की अगली प्रतिक्रिया और अमेरिका की आगे की रणनीति पर टिकी हैं। राजनयिक प्रयासों के बावजूद, दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है, जिससे शांति की राह और मुश्किल होती जा रही है।