मिस्र के भूमध्यसागरीय तट पर स्थित दमियाता बंदरगाह पर एक ड्रोन हमले में गैस भंडारण टैंकर को निशाना बनाया गया, जिससे भीषण आग लग गई। सुरक्षा फर्म एम्ब्रे के अनुसार, यह हमला एक अमेरिकी स्वामित्व वाले टैंकर पर किया गया था, जिससे क्षेत्र में पहले से जारी तनाव और बढ़ गया है। घटना के तुरंत बाद बंदरगाह अधिकारियों ने आग बुझाने के प्रयास शुरू किए, लेकिन आग की लपटें कई घंटों तक उठती रहीं। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ड्रोन ने टैंकर के डेक पर विस्फोटक गिराया, जिससे तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के टैंक में रिसाव हुआ और तत्काल आग भड़क उठी। मिस्र की सरकारी समाचार एजेंसी ने बताया कि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन बंदरगाह के संचालन को एहतियातन रोक दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के हमले वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में हूती विद्रोहियों द्वारा वाणिज्यिक जहाजों पर हमले बढ़ गए हैं। अमेरिकी और ब्रिटिश सेनाओं ने हाल ही में यमन में हूती ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि दमियाता पर हमला ईरान समर्थित समूहों द्वारा क्षेत्रीय संघर्ष को व्यापक बनाने का प्रयास हो सकता है। मिस्र ने घटना की जांच शुरू कर दी है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया है। इस घटना ने एक बार फिर मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक अस्थिरता को उजागर किया है, जहां ऊर्जा बुनियादी ढांचे लगातार निशाने पर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसे हमले जारी रहे तो वैश्विक गैस और तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिससे विश्व अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ेगा। मिस्र, जो स्वयं एक प्रमुख ऊर्जा पारगमन केंद्र है, अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा बढ़ाने पर विचार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस बढ़ते खतरे का सामूहिक समाधान निकालना होगा, ताकि समुद्री व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित रहे।