लोकसभा ने बुधवार को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 को पारित कर दिया, जिसमें परीक्षा में अनियमितता और पेपर लीक जैसे गंभीर अपराधों के लिए न्यूनतम पांच वर्ष की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यह विधेयक देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की पवित्रता बनाए रखने और युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को रोकने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। सदन में शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस विधेयक को पेश करते हुए कहा कि यह कानून पेपर लीक के पूरे तंत्र को ध्वस्त करने के उद्देश्य से लाया गया है, जिससे संगठित अपराध करने वाले गिरोहों पर प्रभावी अंकुश लग सकेगा। नए संशोधन विधेयक के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति परीक्षा प्रश्नपत्र लीक करने, अनुचित साधनों का उपयोग करने या परीक्षा प्रक्रिया को बाधित करने का दोषी पाया जाता है, तो उसे कम से कम पांच वर्ष की कैद और दस लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है। वहीं, यदि कोई संगठित गिरोह या संस्था इसमें संलिप्त पाई जाती है, तो सजा को बढ़ाकर दस वर्ष तक किया जा सकता है और संपत्ति जब्ती का भी प्रावधान है। विधेयक में परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही भी तय की गई है, ताकि प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही न हो। इसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की परीक्षाओं को शामिल किया गया है। विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने हंगामा किया और इसे जल्दबाजी में लाया गया कदम बताया, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया कि पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं से करोड़ों छात्रों का विश्वास डगमगा रहा था, इसलिए कड़ा कानून आवश्यक था। शिक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राज्यों में पेपर लीक के मामलों ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे, और यह विधेयक उसी चिंता का समाधान है। उन्होंने आश्वासन दिया कि कानून का दुरुपयोग नहीं होगा और वास्तविक दोषियों पर ही कार्रवाई होगी। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सहयोगी पार्टी शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) ने लोकसभा में छात्रों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए इसे 'सतर्क करने वाला संकेत' बताया। पार्टी ने कहा कि युवाओं का आक्रोश जायज है क्योंकि उनके भविष्य के साथ बार-बार खिलवाड़ हुआ है। हालांकि, उन्होंने नए कानून का स्वागत करते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। संसद में इस दौरान नई पीढ़ी की शब्दावली जैसे 'कुचु-पुचु', 'डेलुलु', 'क्लॉक इट' आदि शब्दों की चर्चा भी हुई, जो युवाओं की भाषा को दर्शाती है। इस विधेयक के पारित होने से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता आएगी, साथ ही पेपर लीक माफिया पर नकेल कसने में मदद मिलेगी। अब इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा और वहां से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कठोर कानून ही काफी नहीं होगा, बल्कि इसके क्रियान्वयन के लिए तकनीकी उपाय, निगरानी तंत्र और प्रशासनिक इच्छाशक्ति भी आवश्यक है। यह कानून देश के करोड़ों मेहनती युवाओं के सपनों की रक्षा करने वाला एक मजबूत कवच साबित होगा।