कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस बर्बरता को लेकर गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है। संसद के शीतकालीन सत्र में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ, जहां विपक्ष ने सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अमित शाह को बर्खास्त करने की अपील करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई संविधान और नागरिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी रखी। दिल्ली के विभिन्न विश्वविद्यालयों में छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर पुलिस की कथित सख्त कार्रवाई के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विपक्ष हमलावर हो गया। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले दागे और कई छात्रों को गंभीर चोटें आईं। वहीं, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में सरकार का बचाव करते हुए कहा कि पुलिस ने "अत्यधिक संयम" बरता और "कोई गोली नहीं चलाई गई"। उन्होंने प्रदर्शनों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए विपक्ष पर युवाओं को भड़काने का आरोप लगाया। संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर तीखी नोकझोंक हुई। राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी करते हुए गृहमंत्री के बयान की मांग की, जिसके चलते कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने के लिए पुलिस बल का दुरुपयोग कर रही है। वहीं, भाजपा नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति कर रहा है और पुलिस कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी थी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग संवैधानिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। मानवाधिकार संगठनों ने भी पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच की मांग का समर्थन किया है। दिल्ली पुलिस आयुक्त ने आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन विपक्ष इसे अपर्याप्त बता रहा है। इस बीच, छात्र संगठनों ने अपना आंदोलन जारी रखने की घोषणा की है, जिससे आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ने की आशंका है। यह पूरा प्रकरण लोकतांत्रिक संस्थाओं, पुलिस जवाबदेही और नागरिक अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। संसद में जारी गतिरोध और सड़कों पर चल रहे प्रदर्शन दर्शाते हैं कि यह मुद्दा जल्द थमने वाला नहीं है। सरकार के लिए चुनौती है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा भी करे। विपक्ष के लिए यह अवसर है कि वह जनता के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाए। अंततः, सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में निष्पक्ष जांच ही इस संकट का समाधान निकाल सकती है, जिससे दोषियों को सजा मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।