अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी रखे तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए मिसाइल हमले के बाद ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया मंच पर लिखे एक पोस्ट में स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका ईरान को ऐसा 'सबक' सिखाएगा जिसे वह कभी नहीं भूल पाएगा। यह बयान मध्य-पूर्व में पहले से ही तनावपूर्ण माहौल को और अधिक गर्मा गया है। हालिया घटनाक्रम के अनुसार, ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने 'टावर 22' पर ड्रोन और मिसाइल हमला किया, जिसमें तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हुए। यह हमला 7 अक्टूबर के बाद से अमेरिकी सेना पर सबसे घातक हमलों में से एक माना जा रहा है। इसके जवाब में अमेरिका ने इराक और सीरिया में ईरान समर्थित ठिकानों पर हवाई हमले किए, लेकिन तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा। ट्रम्प ने अपने बयान में वर्तमान बाइडन प्रशासन की नीतियों को कमजोर बताते हुए दावा किया कि उनकी सरकार होती तो ईरान ऐसा दुस्साहस कभी नहीं करता। उन्होंने कहा, "हम ईरान को ऐसा सबक सिखाएंगे जो इतिहास में दर्ज होगा।" इस बयान को उनके आगामी राष्ट्रपति चुनाव अभियान से जोड़कर भी देखा जा रहा है, जहां वे विदेश नीति में सख्त रुख को अपना प्रमुख मुद्दा बना रहे हैं। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस ताजा टकराव से पूरे मध्य-पूर्व में संघर्ष फैलने का खतरा बढ़ गया है। इराक में अमेरिकी और सऊदी ठिकानों पर हमले, लाल सागर में हूती विद्रोहियों की गतिविधियां और अब जॉर्डन में सीधा हमला - ये सभी एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की ओर इशारा कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र और कई यूरोपीय देशों ने संयम बरतने की अपील की है, लेकिन दोनों पक्षों के तेवर नरम पड़ते नहीं दिख रहे। निष्कर्षतः, अमेरिका और ईरान के बीच जारी इस शत्रुता ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। आने वाले दिनों में यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहे तो यह संघर्ष एक व्यापक युद्ध का रूप ले सकता है, जिसकी कीमत पूरी दुनिया को चुकानी पड़ सकती है।