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Breaking News: सुप्रीम कोर्ट ने पैलेट गन पर प्रतिबंध की याचिका पर दिल्ली सरकार से घायल प्रदर्शनकारियों के इलाज का मांगा ब्यौरा, कश्मीर अध्ययन ने खोले गंभीर मनोवैज्ञानिक प्रभाव
🕒 47 minutes ago

उच्चतम न्यायालय ने पैलेट गन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान घायल हुए प्रदर्शनकारियों के उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करे। न्यायालय ने रैपिड एक्शन फोर्स से जंतर मंतर विरोध प्रदर्शन के दौरान उपयोग की गई गोला-बारूद का पूरा ब्यौरा भी मांगा है। न्यायाधीशों ने स्पष्ट किया कि पैलेट गन का प्रयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जा सकता है, इसके बावजूद इसके दुरुपयोग की आशंका बनी हुई है। इस मामले की अगली सुनवाई में केंद्र सरकार को भी विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है। कश्मीर में किए गए एक विस्तृत अध्ययन ने पैलेट गन के घावों के भयावह मनोवैज्ञानिक प्रभावों को उजागर किया है। अध्ययन के अनुसार, पैलेट गन की चोट झेलने वाले लोगों में अवसाद, पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) और मादक द्रव्यों के सेवन की प्रवृत्ति अत्यधिक पाई गई है। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि पैलेट गन की चोटें स्थायी विकलांगता और अपूरणीय क्षति का कारण बन सकती हैं, भले ही समय पर उपचार मिल जाए। आंखों की रोशनी चले जाना, चेहरे की विकृति और तंत्रिका तंत्र को स्थायी क्षति इसके प्रमुख दुष्परिणाम हैं। इस बीच, एनडीटीवी के हस्तक्षेप के बाद 2016 में कश्मीर में पैलेट गन से अपनी आंखों की रोशनी गंवाने वाले एक पीड़ित को मुआवजा मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। यह मामला उन सैकड़ों पीड़ितों के लिए आशा की किरण बनकर आया है जो वर्षों से न्याय और पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मानवाधिकार संगठन लंबे समय से पैलेट गन को 'गैर-घातक' हथियार के रूप में वर्गीकृत किए जाने का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि इसके वास्तविक प्रभाव घातक और जीवन-परिवर्तक सिद्ध हुए हैं। न्यायालय की वर्तमान सुनवाई में याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि भीड़ नियंत्रण के लिए पैलेट गन का अंधाधुंध उपयोग संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का हवाला देते हुए मांग की कि भारत को पैलेट गन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना चाहिए और भीड़ नियंत्रण के लिए कम हानिकारक विकल्प अपनाने चाहिए। सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने न्यायालय को आश्वासन दिया कि मानक संचालन प्रक्रिया का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर न्यायालय का अंतिम निर्णय न केवल कश्मीर और दिल्ली के प्रदर्शनकारियों बल्कि पूरे देश में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्यप्रणाली को प्रभावित करेगा। चिकित्सा विशेषज्ञों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कानूनी जानकारों की निगाहें अब उच्चतम न्यायालय के फैसले पर टिकी हैं। यदि न्यायालय पैलेट गन पर प्रतिबंध लगाता है या इसके उपयोग के लिए अत्यंत कठोर दिशानिर्देश जारी करता है, तो यह नागरिक स्वतंत्रता और राज्य की शक्ति के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा। पीड़ितों के पुनर्वास और मुआवजे की व्यवस्था को भी मजबूत करने की आवश्यकता है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 30 Jul 2026