📰 Kotputli News
Breaking News: आईआईटी मद्रास के निदेशक वी कामकोटी: असामान्य सफर और एनटीए सुधार की बड़ी जिम्मेदारी
🕒 1 hour ago

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी कामकोटी का जीवन परिचय किसी भी पारंपरिक आईआईटी स्नातक से बिल्कुल अलग है। उनके पास पासपोर्ट तक नहीं है और वे जेईई परीक्षा में असफल रहे थे, फिर भी उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है। अब केंद्र सरकार ने उन्हें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के सुधार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है, जिससे वे देश की सबसे बड़ी परीक्षा प्रणाली में बदलाव लाएंगे। प्रोफेसर कामकोटी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब एनटीए कई विवादों से घिरा हुआ है। पेपर लीक, तकनीकी खामियां और परीक्षा आयोजन में अनियमितताओं के कारण छात्रों और अभिभावकों का विश्वास डगमगाया है। कामकोटी को उनकी तकनीकी विशेषज्ञता और प्रशासनिक क्षमता के कारण इस पद के लिए चुना गया है। वे कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त विशेषज्ञ हैं और आईआईटी मद्रास को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हालांकि, उनकी नियुक्ति के साथ ही एक राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने एक टिप्पणी में उन्हें 'गोमूत्र विशेषज्ञ' कहकर संबोधित किया, जिसके बाद देशभर के 215 से अधिक शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों ने कड़ी आपत्ति जताई है। इन शिक्षाविदों का कहना है कि किसी विद्वान की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली ऐसी टिप्पणियां लोकतांत्रिक मर्यादा के विपरीत हैं। उन्होंने प्रियंका गांधी से माफी की मांग करते हुए कहा कि वैज्ञानिक योगदान का मजाक उड़ाना उचित नहीं है। शिक्षाविदों के इस समूह में विभिन्न आईआईटी, आईआईएससी और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रोफेसर शामिल हैं। उनका तर्क है कि प्रोफेसर कामकोटी ने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर शोध किया है, जिसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। विवाद बढ़ने पर कई राजनीतिक दलों ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कामकोटी की नियुक्ति उनकी योग्यता के आधार पर हुई है और वे एनटीए में पारदर्शिता तथा दक्षता लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। निष्कर्षतः, प्रोफेसर वी कामकोटी का सफर यह साबित करता है कि असफलताएं सफलता की सीढ़ी बन सकती हैं। एनटीए प्रमुख के रूप में उनकी नियुक्ति देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार की नई आशा जगाती है। साथ ही, हालिया विवाद यह भी याद दिलाता है कि सार्वजनिक जीवन में विद्वानों का सम्मान और गरिमा बनाए रखना सभी का दायित्व है। आने वाले समय में उनके नेतृत्व में एनटीए किस तरह के बदलाव लाता है, इस पर पूरे देश की नजर रहेगी।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 30 Jul 2026