बॉलीवुड अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत तथा सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास के बीच चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब कंगना ने जेनरेशन जेड के विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए युवाओं को 'कुछ हुनर सीखने' की सलाह दी थी। इस बयान पर सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई। देखते ही देखते यह विवाद राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बन गया और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी इसमें कूद पड़े। विवाद के ताजा घटनाक्रम में कंगना रनौत ने सौरव दास पर व्यक्तिगत हमले करते हुए उन्हें 'बेकार और बेरोजगार' करार दिया। अभिनेत्री से नेता बनीं कंगना ने कहा कि दास के मुद्दे व्यक्तिगत हैं और वे केवल ध्यान आकर्षित करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। इसके जवाब में सौरव दास ने भी कंगना की आयु, कार्यशैली और जेनरेशन जेड के प्रदर्शनों पर उनकी टिप्पणियों को लेकर पलटवार किया। इस जुबानी जंग में अब राखी सावंत भी कूद पड़ी हैं, जिन्होंने कंगना को 'गटर माउथ' और 'चुड़ैल' जैसे अपशब्द कहे हैं। राखी के इस बयान ने विवाद को और अधिक तूल दे दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंगना ने सीजेपी के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए प्रदर्शनकारियों को 'कॉकरोच' तक कह डाला। उन्होंने सवाल उठाया कि 'ये कॉकरोच अपनी गंदगी फैला रहे हैं, इन्हें पैदा कौन कर रहा है?' इस बयान की चौतरफा निंदा हो रही है। द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया और डेक्कन हेराल्ड जैसे प्रमुख समाचार पत्रों ने इस विवाद को प्रमुखता से कवर किया है। राजनीतिक गलियारों में भी इस पर चर्चा तेज है, जहां भाजपा सांसद के इस तरह के बयानों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस पूरे प्रकरण ने सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, जनप्रतिनिधियों की भाषा और युवा पीढ़ी के अधिकारों जैसे गंभीर मुद्दों को जन्म दे दिया है। एक तरफ जहां कंगना के समर्थक उनके बेबाक अंदाज की तारीफ कर रहे हैं, वहीं आलोचकों का मानना है कि एक सांसद को ऐसी भाषा शोभा नहीं देती। सीजेपी ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कंगना के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि दोनों ही पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे। निष्कर्षतः, कंगना रनौत और सौरव दास के बीच शुरू हुआ यह विवाद अब व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का विषय बन चुका है। एक जनप्रतिनिधि द्वारा युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रयुक्त भाषा ने संसदीय मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह देखना होगा कि क्या भाजपा नेतृत्व अपनी सांसद के बयानों पर संज्ञान लेता है या फिर यह विवाद यूं ही सोशल मीडिया की भेंट चढ़ जाएगा। एक बात तय है कि इस प्रकरण ने सार्वजनिक जीवन में संयमित भाषा की आवश्यकता को फिर से रेखांकित कर दिया है।