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Breaking News: सऊदी अरब और अमेरिका ने इराक में ईरान समर्थित गुटों पर किए हवाई हमले, क्षेत्र में तनाव बढ़ा
🕒 55 minutes ago

सऊदी अरब और संयुक्त राज्य अमेरिका की सेनाओं ने संयुक्त रूप से इराक में ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों के ठिकानों पर सिलसिलेवार हवाई हमले किए हैं। ये हमले इराक के पश्चिमी अनबार प्रांत और सीरिया से लगी सीमा के निकट स्थित सैन्य अड्डों पर केंद्रित थे। अधिकारियों के अनुसार, ये कार्रवाई हाल के हफ्तों में क्षेत्र में अमेरिकी बलों और सहयोगी देशों के ठिकानों पर हुए ड्रोन और रॉकेट हमलों के जवाब में की गई है। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ये हमले "आतंकवादी तत्वों" को निशाना बनाने के लिए किए गए हैं जो क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने पुष्टि की है कि हमलों में ईरान समर्थित कताइब हिजबुल्लाह और अन्य मिलिशिया समूहों के हथियार भंडार, कमांड सेंटर और प्रशिक्षण शिविरों को निशाना बनाया गया। इराकी सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, कम से कम १२ लड़ाके मारे गए और कई घायल हुए हैं। इराकी सरकार ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कड़ी निंदा की है और कहा है कि ऐसी एकतरफा कार्रवाइयों से क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ेगी। वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय ने हमलों को "अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन" करार दिया और बदले की कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति को और गहरा दिया है। गाजा युद्ध के बाद से क्षेत्र में ईरान समर्थित गुटों और अमेरिकी-इजराइली गठबंधन के बीच छद्म संघर्ष तेज हो गया है। इराक की सरकार, जो अमेरिका और ईरान दोनों के साथ संबंध संतुलित करने की कोशिश कर रही है, के लिए ये हमले एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती बन गए हैं। संसद में कई गुटों ने अमेरिकी सैनिकों की पूर्ण वापसी की मांग तेज कर दी है। सऊदी अरब की भागीदारी इस बात का संकेत है कि खाड़ी देश भी ईरान के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए अधिक सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ये हमले तात्कालिक रूप से मिलिशिया की क्षमता को कमजोर कर सकते हैं, लेकिन लंबे समय में ये क्षेत्र में संघर्ष के एक नए चक्र को जन्म दे सकते हैं। इराक की स्थिरता, जो वर्षों के संघर्ष के बाद धीरे-धीरे पटरी पर आ रही थी, फिर से खतरे में पड़ गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने संयम बरतने और तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक रास्ते अपनाने का आह्वान किया है, लेकिन जमीनी हालात बताते हैं कि आने वाले दिनों में और भी टकराव देखने को मिल सकते हैं।

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✍️ By Pradeep Yadav | 29 Jul 2026