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Breaking News: धर्मेंद्र प्रधान ने ठुकराया मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव, संसद में भव्य स्वागत पर विपक्ष का तीखा हमला
🕒 1 hour ago

केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव दिए जाने की खबर सामने आई है, जिसे सूत्रों के हवाले से प्रधान ने अस्वीकार कर दिया। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। माना जा रहा है कि कैबिनेट फेरबदल की संभावनाओं के बीच प्रधान को कोई अन्य महत्वपूर्ण विभाग सौंपने की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने वर्तमान दायित्व में ही बने रहने की इच्छा जताई। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और विभिन्न परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल का विश्लेषण करते हुए राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में नई शिक्षा नीति 2020 को आगे बढ़ाने का काम हुआ है, लेकिन पेपर लीक, NEET-UG विवाद और CUET की तकनीकी खामियों जैसे मुद्दों ने उनकी छवि को प्रभावित किया है। द हिंदू की एक रिपोर्ट में उनके रिपोर्ट कार्ड का विस्तृत विश्लेषण करते हुए उपलब्धियों और विफलताओं दोनों को रेखांकित किया गया है। वहीं, एनडीटीवी के एक विचार लेख में इसे 'उम्र' की राजनीति से जोड़कर देखा गया है, जिसमें कहा गया है कि प्रधान का संभावित निकास भाजपा की आंतरिक पीढ़ीगत बदलाव की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। संसद के मानसून सत्र में धर्मेंद्र प्रधान को मिले भव्य स्वागत ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया। भाजपा सांसदों द्वारा 'धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद' के नारों के बीच उनका अभिनंदन किया गया, जिसे विपक्ष ने 'बच्चों के भविष्य के विनाश का जश्न' करार दिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस स्वागत समारोह पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक से लाखों युवाओं का भविष्य अंधकार में डालने वाले मंत्री का ऐसा अभिनंदन भाजपा की संवेदनहीनता को दर्शाता है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जवाबदेही तय करने के बजाय अपने मंत्रियों का बचाव कर रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने मोदी सरकार की कार्यशैली और विपक्ष की रणनीति दोनों को उजागर किया है। एक ओर जहां सरकार अपने मंत्री के साथ मजबूती से खड़ी दिख रही है, वहीं विपक्ष इसे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बता कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक गर्मा सकता है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र संगठन भी मुखर हो रहे हैं, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ना तय है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 28 Jul 2026