सुप्रीम कोर्ट ने NEET और CJP छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और पुलिस की कथित ज्यादतियों की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि "जिसने भी ज्यादती की है, उसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए"। न्यायालय ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए हिरासत में लिए गए सभी छात्रों को तत्काल रिहा करने का निर्देश भी दिया है। यह फैसला विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आया, जिनमें पुलिस कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मामला गंभीर है और उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है। SIT में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और स्वतंत्र विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध होनी चाहिए। लाइव लॉ, द हिंदू, टाइम्स ऑफ इंडिया और इंडिया टुडे की रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए। पृष्ठभूमि में NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और CJP (कैंपस जस्टिस पार्टी) के छात्रों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन शामिल हैं। पिछले दिनों विभिन्न शहरों में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया था, जिसमें कई छात्र घायल हुए और सैकड़ों को हिरासत में लिया गया था। छात्र संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे पुलिस की बर्बरता बताया था और न्यायिक जांच की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश छात्र समुदाय के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। न्यायालय ने राज्य सरकारों और पुलिस महानिदेशकों को SIT को पूर्ण सहयोग देने का निर्देश दिया है। साथ ही, जांच की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है। इस फैसले से न केवल दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त होगा, बल्कि भविष्य में छात्र आंदोलनों से निपटने के लिए दिशानिर्देश भी तय होंगे। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार संरक्षित रहना चाहिए, और सुप्रीम कोर्ट का यह कदम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।