नीट परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों के बाद देशभर में मचे हंगामे को देखते हुए केंद्र सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। सरकार २७ जुलाई को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक २०२६ पेश करने जा रही है। इस विधेयक का मकसद प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल जैसी गड़बड़ियों को पूरी तरह रोकना है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद यह फैसला लिया गया कि परीक्षा प्रणाली को पुख्ता बनाने के लिए कानून में संशोधन जरूरी है। प्रस्तावित विधेयक में पेपर लीक कराने वालों के लिए बेहद सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। दोषी पाए जाने पर कम से कम ५ साल की कैद और ५० लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। अगर कोई संगठित गिरोह इस काम में लिप्त पाया जाता है तो सजा को बढ़ाकर १० साल तक किया जा सकता है। इसके अलावा परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही भी तय की गई है। युवा सांसदों का एक समूह इस विधेयक के पक्ष में सदन में पुरजोर दलीलें पेश करेगा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद घोषणा की कि शाम ५ बजे से इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा होगी। विपक्षी दलों ने भी पेपर लीक की घटनाओं पर चिंता जताते हुए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की थी। संसदीय कार्य मंत्री ने भरोसा दिलाया कि विधेयक को सभी पहलुओं पर विचार के बाद ही अंतिम रूप दिया गया है। चर्चा के दौरान विभिन्न दलों के सांसद अपने सुझाव रख सकेंगे। यह विधेयक देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में नीट, यूपीएससी, एसएससी और राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने अभ्यर्थियों का भरोसा तोड़ा है। नया कानून परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी उपायों के साथ-साथ कानूनी डर भी गड़बड़ी रोकने में कारगर होगा। उम्मीद है कि संसद के मौजूदा सत्र में ही यह विधेयक पारित होकर कानून का रूप ले लेगा। इसके लागू होने के बाद परीक्षा माफिया पर नकेल कसने में मदद मिलेगी और मेहनती छात्रों को उनका हक मिल सकेगा। सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कानून का दुरुपयोग न हो और वास्तविक दोषियों तक ही कार्रवाई सीमित रहे।