असम की राजनीति में एक नया मोड़ तब आया जब राज्य के एक वरिष्ठ मंत्री की बेटी NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुईं। इस घटना ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी और सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया। प्रदर्शन में मंत्री पुत्री की मौजूदगी को विपक्ष ने जहां सरकार के खिलाफ एक बड़े संकेत के रूप में पेश करने की कोशिश की, वहीं मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बेहद परिपक्वता और स्पष्टता के साथ इस पूरे प्रकरण पर अपनी प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर व्यक्ति की अपनी स्वतंत्र सोच और विचारधारा होती है। उन्होंने कहा, "यह जरूरी नहीं कि वह अपने पिता की विचारधारा का पालन करे। एक बेटी या बेटे का अपना स्वतंत्र अस्तित्व होता है और वे अपने विवेक से फैसले ले सकते हैं।" CM ने इस बात पर जोर दिया कि किसी मंत्री या नेता के परिजन अगर किसी लोकतांत्रिक प्रदर्शन में हिस्सा लेते हैं, तो इसे पारिवारिक कलह या सरकार विरोधी कदम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष और आम लोगों से अपील की कि वे मंत्री को उनकी बेटी के निजी फैसले के लिए जिम्मेदार न ठहराएं और न ही उन्हें ट्रोल करें। इस दौरान मुख्यमंत्री ने एक बेहद व्यक्तिगत और साहसिक टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर भविष्य में उनका अपना बेटा भी किसी ऐसे प्रदर्शन में शामिल होता है जो सरकार की नीतियों के विपरीत हो, तो उन्हें कोई आश्चर्य नहीं होगा। उन्होंने कहा, "मेरा बेटा भी बड़ा हो रहा है, कल को अगर वह भी सड़क पर उतरे तो मुझे हैरानी नहीं होगी।" इस बयान के जरिए CM हिमंत ने न केवल पारिवारिक मूल्यों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान करने का संदेश दिया, बल्कि राजनीतिक शुचिता का एक नया उदाहरण भी पेश किया। दरअसल, यह पूरा मामला नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के परिणामों और प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्र संगठनों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। असम में छात्रों का एक बड़ा वर्ग परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है और जांच की मांग कर रहा है। इसी क्रम में सिटीजन जस्टिस एंड पीस (CJP) जैसे संगठनों ने विरोध मार्च निकाला था, जिसमें मंत्री की बेटी भी शामिल हुई थीं। उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने का प्रयास किया, लेकिन मुख्यमंत्री की सधी हुई प्रतिक्रिया ने विपक्ष के हमलों की धार कुंद कर दी। निष्कर्ष के तौर पर देखा जाए तो मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की यह प्रतिक्रिया भारतीय लोकतंत्र में पारिवारिक मर्यादा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के सह-अस्तित्व का एक सशक्त उदाहरण है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए भी निजी रिश्तों और विचारों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए। उनकी इस परिपक्व सोच की प्रशंसा राजनीतिक दायरे से बाहर भी हो रही है। यह घटना यह भी दर्शाती है कि युवा पीढ़ी अब अपने अधिकारों और मुद्दों के लिए मुखर हो रही है, फिर चाहे उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो।