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Breaking News: एनटीए के 47 अधिकारियों पर गिरी गाज, देशव्यापी छात्र आंदोलन के बाद बड़ी कार्रवाई
🕒 1 hour ago

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक सफाई अभियान चलाते हुए केंद्र सरकार ने 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है। यह निर्णय देशभर में चल रहे छात्रों के उग्र प्रदर्शनों और पेपर लीक की घटनाओं के बाद लिया गया है। शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई एनटीए की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विगत कई महीनों से NEET-UG, UGC-NET और CUET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही थीं। छात्र संगठनों ने दिल्ली, मुंबई, पटना, लखनऊ समेत कई प्रमुख शहरों में सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया था। उनकी मुख्य मांग थी कि परीक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार को खत्म किया जाए और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। सरकार ने छात्रों के आक्रोश को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर यह बड़ी कार्रवाई की गई है। बर्खास्त किए गए अधिकारियों में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, परीक्षा नियंत्रक स्तर के अधिकारी और तकनीकी शाखा के कर्मचारी शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन अधिकारियों पर परीक्षा प्रश्नपत्रों की गोपनीयता भंग करने, अनुचित लाभ पहुंचाने और आंतरिक जांच में सहयोग न करने जैसे गंभीर आरोप हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई अंतिम नहीं है, बल्कि जांच पूरी होने पर और भी अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। साथ ही, एनटीए के 39 पदों में से 15 पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं, जिन्हें भरने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इस पूरे प्रकरण को देखते हुए केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए नए कानून लाने की तैयारी भी कर ली है। पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त दंड प्रावधान वाले विधेयक पर काम चल रहा है। इसके अलावा, एनटीए का पुनर्गठन करते हुए इसमें डोमेन विशेषज्ञों और तकनीकी जानकारों को शामिल करने की योजना है, ताकि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल, पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाई जा सके। इस कार्रवाई का देशभर के छात्रों और अभिभावकों ने स्वागत किया है, लेकिन साथ ही वे स्थायी समाधान की मांग भी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अधिकारियों को हटाने से समस्या हल नहीं होगी, बल्कि संस्थागत सुधार, तकनीकी उन्नयन और नैतिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है। सरकार का यह कदम विश्वास बहाली की दिशा में पहला पड़ाव है, लेकिन असली परीक्षा अब इस बात की है कि भविष्य में परीक्षा प्रणाली की पवित्रता कैसे कायम रखी जाती है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 25 Jul 2026