नीट-यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर देशभर में मचे बवाल के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। इस सियासी तूफान के बीच जहां विपक्ष मंत्री की जवाबदेही तय करने पर अड़ा है, वहीं धर्मेंद्र प्रधान अपनी सफाई में सांसदों के साथ सामूहिक तस्वीरें साझा करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो को दोबारा पोस्ट करने तक सीमित नजर आ रहे हैं। छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मसले पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी और शिक्षा मंत्री पर सीधा हमला बोला है। राहुल गांधी ने छात्रों से मुलाकात के बाद स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश के युवाओं को वीडियो नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री को 'भूतकाल' और छात्रों को 'भविष्य' बताते हुए मांग की कि धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाए। राहुल ने यह भी कहा कि केवल मंत्रिमंडल में फेरबदल करने से यह आंदोलन शांत नहीं होगा, बल्कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पारदर्शी जांच ही एकमात्र रास्ता है। दूसरी ओर, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विपक्ष के आरोपों का सीधा जवाब देने के बजाय सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। वे भाजपा सांसदों के साथ समूह तस्वीरें पोस्ट कर एकजुटता दिखाने का प्रयास कर रहे हैं और प्रधानमंत्री मोदी के पुराने वीडियो को साझा कर सरकार की उपलब्धियां गिना रहे हैं। उनकी इस रणनीति को विपक्ष मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश बता रहा है। आलोचकों का कहना है कि जब छात्र सड़कों पर हैं और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है, तब मंत्री का जमीनी हकीकत से दूर केवल डिजिटल प्रचार में व्यस्त रहना उनकी गंभीरता पर सवाल खड़े करता है। इधर, भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर नीट जैसे संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। कर्नाटक के मैसूरु में भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर आरोप लगाया कि पेपर लीक की घटनाएं कांग्रेस शासित राज्यों में हुई हैं और विपक्ष अपनी नाकामी छिपाने के लिए केंद्र सरकार को बदनाम कर रहा है। भाजपा का दावा है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। कुल मिलाकर, नीट विवाद अब एक शैक्षणिक संकट से निकलकर पूर्ण रूप से राजनीतिक युद्धक्षेत्र में तब्दील हो चुका है। एक तरफ विपक्ष मंत्री की बलि लेकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करना चाहता है, तो दूसरी तरफ सत्ताधारी दल विपक्ष पर छात्रों को मोहरा बनाने का इल्जाम लगा रहा है। इस शोर-शराबे के बीच उन लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता दब सी गई है, जो परीक्षा की शुचिता और अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इस भरोसे के संकट से निकलने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।