केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बड़ा फेरबदल करते हुए केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। बिट्टू का राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह कदम उठाया गया है। सूत्रों के अनुसार, उनके इस फैसले के पीछे आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों में सक्रिय भूमिका निभाने की रणनीति मानी जा रही है। लुधियाना से सांसद रहे रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं और पंजाब की राजनीति में एक जाना-माना चेहरा हैं। उन्हें जुलाई 2021 में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया था। उनका राज्यसभा का कार्यकाल हाल ही में समाप्त हुआ, जिसके चलते संवैधानिक प्रावधानों के तहत उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा उन्हें पंजाब में पार्टी के प्रमुख सिख चेहरे के रूप में पेश करना चाहती है। एनडीटीवी और द प्रिंट की रिपोर्ट्स के अनुसार, बिट्टू अब अपना पूरा ध्यान पंजाब की राजनीति पर केंद्रित करेंगे। अटकलें लगाई जा रही हैं कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में लुधियाना सीट से भाजपा के उम्मीदवार हो सकते हैं। पंजाब में भाजपा के पास मजबूत सिख नेतृत्व की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी, और बिट्टू की लोकप्रियता तथा पारिवारिक पृष्ठभूमि उन्हें इस भूमिका के लिए उपयुक्त बनाती है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति ने बिट्टू का इस्तीफा स्वीकार किया है। इस बीच, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार फिलहाल कैबिनेट मंत्री चिराग पासवान को सौंपे जाने की संभावना है। बिट्टू के मंत्रित्वकाल में मंत्रालय ने कई महत्वपूर्ण योजनाओं को आगे बढ़ाया, विशेषकर पंजाब और उत्तर भारत के कृषि-आधारित उद्योगों के लिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिट्टू का मंत्री पद छोड़कर पंजाब की जमीनी राजनीति में उतरना भाजपा की रणनीति का हिस्सा है। पंजाब में अकाली दल से गठबंधन टूटने के बाद भाजपा अपने दम पर पैर जमाने की कोशिश कर रही है। बिट्टू की छवि एक जुझारू नेता की है और वे युवाओं में लोकप्रिय हैं। आने वाले दिनों में उनकी सक्रियता पंजाब के राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे सकती है।