जंतर मंतर के उज्ज्वल कुंडों के बीच आज एक ऐतिहासिक मोड़ देखा गया। सदन государственных की पंक्तियों में संघर्ष के साथ एक विशाल प्रेक्षण समूह जंतर मंतर के परिसर का उपयोग कर अपने असंतोष का प्रदर्शन कर रहा है। मुख्य न्यायाधीश, जिन्होंने सरकार के साथ संवाद के बाद बैठकों की योजना बनाई है, ने साक्षात प्रतिस्पर्धा के दौरान स्पष्ट उत्तर की माँग की है – या तो ‘हां’ या ‘नहीं’, ताकि प्रधानमंत्री के कार्यकाल पर स्पष्टता आ सके। उद स्ट्रक बनता है कि यदि निर्णय स्पष्ट नहीं होता तो यह कदम ओवरहॉल के लिए प्रेरित करेगा और एक नई नीति रूपरेखा पर बातचीत के लिए धरती तैयार करेगा। प्रगतिशील संतुष्टियों के बीच यह दावा था कि सरकार की नीतिगत दिशा अभी भी अस्पष्ट है। भारतenet के कई वरिष्ठ सदस्य विभिन्न प्रकाशनों में इस विषय पर स्वतंत्र प्रबोधन प्रकाशित कर रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि कोई उचित स्पष्टता नहीं दी जाती, तो सरकार को साक्षात्कार और निरीक्षण की विद्यमान प्रक्रम पर पुनर्विचार करना पड़ेगा। इस्तीफे की मांग कीकारण, केंद्रीय संसद की केंद्र सरकार को स्पष्ट जवाब देने के प्रयास को समर्पित करने की भूमिका में, इस विषय को पुष्ट करने के लिए आसन्न प्रकाशन पर प्रकाश डाला गया है। केंद्रीय सरकार की अध्यक्षता में बैठक का तीसरा राउंड भी इसी बातों पर ध्यान देने के लिए निर्धारित किया गया है। समापन में, चल रहा प्रगति और मांगों के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए मुख्य न्यायाधीश अथवा संसद को स्पष्ट रूप से निर्णय लेने की आवश्यकता है। इस प्रकार, जंतर मंतर का प्रदर्शन सरकार के बदलते चलन को निर्णायक बनाने और संतुलन साधने के लिए एक महत्वपूर्ण आह्वान के रूप में उभरता है।