दुर्दैवपूर्ण समाचार ने राष्ट्रीय मीडिया को झकझोर दिया है। एसेल ग्रुप के संस्थापक और प्रसार माध्यम के प्रमुख डॉ. सुब्बैश चंद्र के पिता, नंद किशोर गोयनका का अधिकतम 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया। यह खबर विभिन्न प्रमुख समाचार साइटों पर प्रकाशित हुई, जहाँ कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने इस करुण घड़ी में शोक व्यक्त किया है। नंद जी का निधन एसेल समूह की इतिहास में एक बड़ा क्षति के रूप में दर्ज किया गया है, क्योंकि उन्होंने अपने बेटे को व्यापार में मार्गदर्शन करने के साथ-साथ सामाजिक तथा सांस्कृतिक कार्यों में भी योगदान दिया। नंद किशोर गोयनका का जीवन कार्य अत्यंत प्रभावशाली रहा है। वे 1926 में जन्मे थे और अपने शुरुआती वर्षों में व्यापार की नींव रखने में प्रमुख भूमिका निभाई। बाद में, अपने बेटे सुब्बैश चंद्र के साथ मिलकर उन्होंने एसेल ग्रुप का विस्तार किया, जो आज विज्ञापन, मीडिया, मनोरंजन तथा दूरसंचार क्षेत्रों में प्रमुख नाम बन गया है। नंद जी की शिक्षाएं, उनके कड़े अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना ने उनके परिवार को आगे बढ़ाने में मदद की। उनका निधन केवल परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय उद्योग को भी एक बड़े नेता को खोने जैसा है। इस दुखद समाचार पर विभिन्न मंचों पर शोक संवेदना व्यक्त की गई। पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुर्तार सिंह संधवन ने आधिकारिक रूप से इस निधन पर संवेदना जताई और परिवार के प्रति अपने गहरे समानुभूति प्रकट की। कई उद्योग जगत के प्रमुख व्यक्तियों ने भी नंद जी के योगदान को याद किया और उनका सम्मान किया। मीडिया में प्रकाशित लेखों ने उनके जीवन की उपलब्धियों को विस्तार से बताया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उन्होंने भारतीय उद्योग में जो योगदान दिया, वह अत्यन्त प्रशंसनीय है। नंद किशोर गोयनका की मृत्यु के साथ ही एसेल ग्रुप के इतिहास में एक नया अध्याय समाप्त हो गया है, परन्तु उनके द्वारा स्थापित मूल्यों और सिद्धांतों को आगे भी जारी रखा जाएगा। उनके पुत्र डॉ. सुब्बैश चंद्र ने सार्वजनिक रूप से बताया कि पिता की सीख हमेशा उनके साथ रहेगी और वे उन्हें अपने काम में आगे बढ़ाते रहेंगे। परिवार के सदस्य और कर्मचारियों ने यह वचन दिया है कि नंद जी के सपनों को साकार करने के लिए संस्थान को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा। समापन में कहा जा सकता है कि नंद किशोर गोयनका का इस संसार से विदा होना एक बड़ा शोक है, परन्तु उनका जीवन, उनका कार्य और उनका आदर्श हमेशा याद रखे जाएंगे। भारतीय उद्योग और सामाजिक क्षेत्र में उनका योगदान सदा के लिए स्मरणीय रहेगा, और भविष्य की पीढ़ियां उनके सिद्धांतों को अपनाते हुए आगे बढ़ेंगी।