भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कुछ समाचार माध्यमों में प्रसारित हुईं रिपोर्टों को पूरी तरह से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका के साथ व्यापारिक वार्ता रुक गई है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि ऐसी जानकारी "गलत और भ्रामक" है और इसका उद्देश्य सार्वजनिक राय को भ्रमित करना है। गोयल ने कहा कि भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच व्यापारिक समझौते की बात नहीं रुकी है, बल्कि दोनों पक्षों ने अभी भी कई प्रमुख मुद्दों पर समन्वय जारी रखा है। यह टिप्पणी विभिन्न प्रमुख समाचार चैनलों और पत्रिकाओं में प्रकाशित लेखों के जवाब में की गई, जिनमें यह दावा किया गया था कि भारत ने अमेरिकी प्रस्तावित व्यापार समझौते को अस्वीकार कर दिया है। वास्तव में, भारत और अमेरिकन व्यापार विभाग के बीच चल रहे वार्ताओं में कई महत्वपूर्ण चरण अभी भी प्रगति पर हैं। जस्टिन रैडकी, अमेरिकी वाणिज्य सचिव, ने पहले बताया था कि दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना और टैरिफ़ में लचीलापन लाना एक प्राथमिकता है। भारत की ओर से, गोयल ने दोहराते हुए कहा कि वाणिज्य मंत्रालय ने कभी किसी समझौते को जल्दबाजी में नहीं जाना है और सभी आर्थिक लाभों को संतुलित करने के लिए उचित समय की आवश्यकता है। वह यह भी रेखांकित किया कि वर्तमान में दो देशों के बीच मिलकर काम करने के कई क्षेत्रों, जैसे तकनीकी सहयोग, डिजिटल सेवाओं और उत्पादन के मूल्य श्रृंखला को मजबूती देने के उपाय, चल रहे हैं। विरोधी पक्ष के दावे के बावजूद, कई आर्थिक विश्लेषकों ने कहा है कि व्यापारिक समझौते के लिए आवश्यक शर्तें अभी भी तैयार हो रही हैं। कुछ रिपोर्टों ने यह भी संकेत दिया कि भारत को कुछ अमेरिकी उत्पादन वस्तुओं पर टैरिफ़ में विशेष समझौते चाहिए, जबकि भारत ने कहा है कि वह ऐसी मांगों को उचित परिप्रेक्ष्य में देखेगा। इस बीच, भारत की सरकार ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह स्पष्ट किया कि वह व्यापारिक संबंधों को विविधता प्रदान करने और दोनों देशों के हित में संतुलित समझौते को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर है। अंत में, पीयूष गोयल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत का लक्ष्य न केवल टैरिफ़ मुद्दों को सुलझाना है, बल्कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में अपने तुलनात्मक लाभ को भी मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि ये वार्ताएँ लगातार चल रही हैं और सही समय पर एक ठोस समझौते पर हस्ताक्षर करने की संभावना बनी हुई है। इस प्रकार, वर्तमान में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक वार्ता में कोई ठोस रुकावट आई है; बल्कि, दोनों पक्ष मिलकर एक लाभदायक और संतुलित समझौता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।