भारतीय लोकतंत्र की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर चिंतित होकर 23 विपक्षी दलों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को एक विस्तृत पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने बीजेपी सरकार के तहत चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी, राष्ट्रमंडल जांच एजेंसियों—इन्फॉर्मेशन डिवीजन और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन—के दुरुपयोग और चयनित मतदाता सूची (एसआईआर) के अनियंत्रित संचालन का हवाला दिया है। पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि चुनावी परिणामों को मिथ्या आंकड़ों से बदल कर कानून के तहत राजनैतिक प्रतिद्वंद्वियों को बेमेल कर दिया गया है, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। यहीं नहीं, विपक्ष के अनुसार, न केवल चुनावी धोखाधड़ी के आरोप हैं बल्कि पीडितों के खिलाफ वैध कानूनी उपायों को रोकने के लिए एजेंसियों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया है, जिससे संवैधानिक संस्थानों पर भरोसा कमज़ोर हो रहा है। पत्र में विपक्षी दलों ने विशेष तौर पर 2024 के आम चुनाव के दौरान हुई कई विवादास्पद घटनाओं को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि असंगत वोटिंग मशीनों की कार्यवाही, इलेक्ट्रॉनिक मतदान प्रणाली में अनधिकृत बदलाव और एसआईआर में अनियमित नामांकन ने मतदाता की आवाज़ को दबा दिया। इसके अलावा, एजेंसियों द्वारा कई विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर बिना ठोस सबूत के मुकदमे चलाए जा रहे हैं, जो कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को भयभीत करने का एक स्पष्ट संकेत है। इस संदर्भ में विपक्ष ने न्यायपालिका से अपील की है कि वह इन घटनाओं की पूरी जाँच करे और आवश्यक कदम उठाए, ताकि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय को पुनः स्थापित किया जा सके। पक्षों ने यह भी कहा कि जब सभी राष्ट्रीय संस्थाएं—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पातीं, तो लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न होता है। उन्होंने न्यायालय से यह मांग की है कि सीजेआई इस पत्र को आधिकारिक तौर पर स्वीकारें और एक स्वतंत्र जांच आयोग का गठन करें, जिसमें सभी पक्षों को सुनने का अधिकार हो। इस प्रक्रिया में, निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप जांच टीम को शामिल करने की भी सिफारिश की गई है। इसके साथ ही, विपक्ष ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भारतीय लोकतंत्र को बचाने के लिए सिविल समाज, मीडिया और जनता को भी सतर्क रहना चाहिए और किसी भी प्रकार की कूटनीति के विरुद्ध आवाज़ उठानी चाहिए। समाप्ति में, सभी विरोधी दलों ने इस पत्र को राष्ट्रीय हित की रक्षा के लिए एक सामूहिक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यदि न्यायपालिका इस मुद्दे को गंभीरता से लेती है और आवश्यक कार्रवाई करती है, तो लोकतांत्रिक संस्थाओं में भरोसा फिर से स्थापित हो सकेगा। अन्यथा, यह कूटनीति केवल एक नया प्रचलन बन कर रह जाएगा, जिससे लोकतंत्र की नींव कमजोर होती जाएगी। इस लिए, विपक्ष ने सभी नागरिकों से इस मुद्दे पर जागरूक रहने, सूचनाओं को सत्यापित करने और न्याय के लिए आवाज़ उठाने का आह्वान किया है।