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Breaking News: इंडस जल समझौते पर भारत की सटीक रुख: विदेशी दबावों के सामने सुदृढ़ स्थिति
🕒 1 hour ago

भारत के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में पाकिस्तान के कई कठोर बयानों के जवाब में स्पष्ट किया कि भारत का इंडस जल समझौता (इंडस वाटर ट्रीटी) के प्रति रुख हमेशा से स्थिर और निरंतर रहा है। यह स्पष्ट बयान दो प्रमुख घटनाओं के बाद आया है: एक ओर, पाकिस्तान ने भारत को जल प्रवाह में बदलाव का खतरा उजागर करते हुए कई चेतावनियां दीं; दूसरी ओर, भारत ने अपने जल संसाधनों के प्रबंधन में टिकाऊ विकास और क्षेत्रीय सहयोग के महत्व को दोहराते हुए, बांग्लादेश को टेस्ता नदी के जल वितरण पर अपने विचार बताए। भारत ने कहा कि वह समझौते के मूल सिद्धान्तों का पूर्ण सम्मान करता है और कोई भी कदम उठाने से पहले अंतरराष्ट्रीय क़ानून और जल सुरक्षा के सिद्धान्तों का पालन करेगा। इंडस जल समझौताके तहत भारत, पाकिस्तान और चीन को जल वितरण के अधिकार तय किए गए हैं, जिसमें भारत को तीन प्रमुख नदियों—इंडस, जेन्ना और शीखोटी—पर नियंत्रण एवं प्रयोग का अधिकार मिलता है, जबकि पाकिस्तान को अन्य दो नदियों—क्रिशन और सतलुज—पर अधिकार है। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों को बंध्यताओं को पूरा करने की जिम्मेदारी है, और किसी भी unilateral कदम को अंतरराष्ट्रीय मंच पर चुनौती का सामना करना पड़ता है। भारत ने कहा कि वह इस समझौते की शर्तों के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करता रहेगा, जिसमें जल प्रवाह में कोई भी अनावश्यक बाधा नहीं डाली जाएगी। इस संदर्भ में, मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत ने अपने जल प्रबंधन के लिए कोई नई रणनीति नहीं अपनाई है जिसका आधार समझौते के विरुद्ध हो। पाकिस्तान की ओर से लगातार दावों के सामने भारत ने कहा कि थ्रेट करने वाले बयानों को वह "बेनामी" और "बिना ठोस आधार" के रूप में देखता है। भारत ने यह भी कहा कि जल सुरक्षा के मुद्दे को राजनीतिक खेल के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय को इस प्रकार के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। इस कारण भारत ने हॉग के न्यायिक फैसले को अस्वीकार किया है, यह तर्क देते हुए कि समझौता दो पक्षीय है और किसी भी तीसरे देश का हस्तक्षेप असंगत है। इस प्रकार की स्थिति में, भारत ने अपने जल नीतियों को स्वच्छ, पारदर्शी और समग्र विकास के सिद्धान्तों के अनुसार चलाने का उत्साह बढ़ाया है। अंत में, विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत का लक्ष्य जल संसाधनों को सतत् रूप से उपयोग करना, जल सुरक्षा को मजबूत बनाना और पड़ोसी देशों के साथ शांति और सहयोग के माहौल को बनाए रखना है। यह रुख न केवल भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करता है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान के लगातार चेतावनीपूर्ण बयानों के बावजूद, भारत ने अपनी स्थिति को स्पष्ट रूप से दोहराया है कि वह इंडस जल समझौते के सभी प्रावधानों का सम्मान करेगा और किसी भी अनावश्यक कदम से बचते हुए जल नीति में पारदर्शिता बनाए रखेगा। यह स्पष्ट और निरंतर रुख भारत की जल सुरक्षा नीति में एक मजबूत नींव की तरह कार्य करेगा, जिससे भविष्य में संभावित विवादों को टाला जा सकेगा।

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✍️ By Pradeep Yadav | 03 Jul 2026