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Breaking News: रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 52,000 करोड़ रुपये के सैन्य राजस्व को मंजूरी दी: मिलिट्री को मिलेगा नया आयुध मिश्रण
🕒 1 hour ago

रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने इस सप्ताह भारत के सैन्य उपकरणों की खरीद के लिए 52,000 करोड़ रुपये का विशाल बजट मंजूरी दी, जिससे भारतीय सेना और वायुसेना को अत्याधुनिक हथियार, ड्रोन और मिसाइल प्रणालियों से सशक्त किया जाएगा। यह निर्णय प्रधानमंत्री के अंतर्गत चल रहे "आधुनिकीकरण योजना" का एक अहम कदम माना जा रहा है, जिसमें त्वरित रूप से क्षमताओं को बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू रक्षा उद्योग को प्रोत्साहन देना प्रमुख उद्देश्य है। परिषद की बैठक में प्रमुख संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने विस्तृत अभिप्राय प्रस्तुत किया, और पेश किए गए प्रस्तावों में क़तारिया ड्रोन, मार्गदर्शित मिसाइल, एंटी‑टैंक हथियार और स्यूडो‑सैटेलाइट जैसी तकनीकी उन्नत वस्तुएँ शामिल थीं। इन सभी को लेकर, विभाग ने स्पष्ट रूप से कहा कि ये उपकरण भारत की सीमाओं की रक्षा, रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता और तेज़ प्रतिक्रिया समय को सुनिश्चित करेंगे। मंजूर प्रस्तावों में सबसे चर्चा का विषय क़तारिया (कमीकेज) ड्रोन और मार्गदर्शित मिसाइलें हैं, जो युद्धभूमि में उच्च सटीकता और तेज़ी से निशाना साधने की क्षमताओं के कारण रक्षा विशेषज्ञों द्वारा सराहे जा रहे हैं। साथ ही, एंटी‑टैंक गाइडेड एंटी‑टैंकर ग्रेनेड (ATGM) और नई पीढ़ी की हाइड्रॉजन-एन्हांस्ड एंटी‑एयरक्राफ्ट मिसाइल (HAMMER) को भी सूची में शामिल किया गया है। इन हथियारों का उपयोग करके भारतीय सेना तटस्थ क्षेत्रों में विस्तृत कवरेज और दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों पर दबाव कायम कर सकेगी। इसके अतिरिक्त, नवीनतम जेट‑रेंजिंग उपकरण और साइबर सुरक्षा प्रणाली में निवेश से भारतीय रक्षा बलों की संपूर्ण युद्ध तैयारी में मजबूती आएगी। वास्तव में, इस 52,000 करोड़ रुपये के पैकेज में लगभग 5.46 बिलियन डॉलर के विदेशी मिलिट्री उपकरणों का भी समावेश है, जिसका स्रोत मुख्यतः यूरोपीय और अमेरिकी कंपनियों के साथ वार्ता के बाद तय हुआ। इस राशि में कई बड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं, जैसे कि क़तारिया ड्रोन की बड़ी संख्या, सटीक मार्गदर्शित मिसाइलों की डिलीवरी और ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) आधारित स्यूडो‑सैटेलाइट नेटवर्क का निर्माण। इन सभी कदमों से भारतीय रक्षा उद्योग को आयात पर निर्भरता कम करने और स्वदेशी उत्पादन को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी। निष्कर्षतः, रक्षा अधिग्रहण परिषद की इस मंजूरी से भारत को अपने राष्ट्रीय सुरक्षा ढाँचे को मजबूत करने, नए तकनीकी आयुध को अपनाने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का अवसर मिला है। यह कदम न केवल भारतीय सैन्य शक्ति को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाता है, बल्कि घरेलू रक्षा उत्पादन को भी गति देता है, जिससे रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। देश को अब यह देखना होगा कि योजना का प्रभावी कार्यान्वयन कैसे सुनिश्चित किया जाए, ताकि यह बड़े निवेश का एक प्रभावी परिणाम बन सके और भारत की रक्षा रणनीति में एक नया युग आरम्भ हो सके।

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✍️ By Pradeep Yadav | 03 Jul 2026