अयोध्या के प्रसिद्द राम मंदिर के दान के संग्रह में हुई चकनाचूर चोरी ने पूरे भारत में हलचल मचा दी है। जांच अधिकारी बताते हैं कि गुप्त रूप से चुराया गया बड़ी राशि, लगभग दो करोड़ रुपये, को मंदिर के एक बाथरूम में छिपाया गया और फिर छोटे-छोटे भागों में विभाजित करके बाहर ले जाया गया। यह घातक योजना इस तरह तैयार की गई थी कि कोई भी सामान्य निरीक्षण इसे देख नहीं पा रहा था। जांच के दौरान यह पता चला कि चोरी के बाद कई एम्बुलेंस और निजी वाहनों के माध्यम से नकदी को कई बार छोटे-छोटे पैकेटों में बांधे जा कर, मंदिर परिसर के विभिन्न निकासों से बाहर भेजा गया। चोरी करने वालों ने बाथरूम में छिपाई हुई नकदी को पहले छिपाने के लिए एक फर्नीचर के नीचे रखा और फिर उसे धीरे-धीरे छोटे-छोटे थैलों में बांट कर, द्वार के पास से पहरेदारों को मात देकर बाहर ले गए। इस अचरजभरे मोड़ ने यह स्पष्ट कर दिया कि चोरी को अंजाम देने वाले लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था को भेदने के लिये जटिल रणनीति अपनाई थी। इस मामले में कई प्रमुख अधिकारी भी पूछताछ के दौर में शामिल हुए। पूर्व ट्रस्ट सदस्य चम्पत राय को, जो इस समय भी राम मंदिर ट्रस्ट में अपने पद से लेकर हटाए नहीं गए हैं, को मुख्य योगदानकर्ता बताया गया है। आरोप है कि उन्होंने अपने सहयोगी तिन्नू यादव को इस चोरी में शामिल किया और इस योजना को अंजाम देने में सहारा दिया। हालांकि, चम्पत राय ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि यह सभी विवादित अफवाहें हैं और असली जिम्मेदारियों को साफ़ नहीं किया गया। जांच एजेंसियों ने इस केस को "राम राज्य" फंड के संदर्भ में भी देखना शुरू किया है, क्योंकि चोरी की गई राशि में से कुछ भाग का उपयोग तोड़-फोड़ या अतिक्रमण कार्यों में किया जा सकता है। इस बीच, वीएचपी के मुख्य अलीशा कुमार ने भी इस चोरी को ट्रस्ट की अनदेखी और अपर्याप्त निरीक्षण का परिणाम बताया है, और कहा है कि चम्पत राय की भूमिका में लापरवाही के कारण यह मामला उजागर हुआ। अब तक की रिपोर्टों से यह स्पष्ट है कि बाथरूम में नकदी छुपाने की इस चतुर योजना के कारण बड़ी राशि चोरी हो पाई। पुलिस ने सभी संदेहियों पर कड़ी कार्रवाई की घोषणा की है और आगे के रिहर्सल को रोकने के लिये सुरक्षा उपायों को सख्त करने का आदेश दिया है। यह मामला न केवल धार्मिक संवेदनाओं को हिलाता है, बल्कि सार्वजनिक निधियों की सुरक्षा के प्रति जनविश्वास को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है।