केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने हाल ही में कक्षा सात, आठ और नौ में लागू होने वाली तीन भाषा नीति में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इस नई दिशा-निर्देशिका के तहत विद्यार्थियों को अब दो विदेशी भाषाओं में से चुनने का विकल्प दिया गया है, जिससे भाषा सीखने की प्रक्रिया अधिक लचीली और छात्र‑केंद्रित बन जाएगी। बोर्ड का मानना है कि इस कदम से छात्रों की भाषाई क्षमता के साथ-साथ उनकी भविष्य की शैक्षणिक और पेशेवर संभावनाओं में भी वृद्धि होगी। सीबीएसई के नए नियम में कहा गया है कि अब छात्रों को अनिवार्य रूप से किसी एक क्षेत्रीय भाषा के साथ दो विदेशी भाषा विकल्पों में से कोई एक चुनने की आज़ादी होगी। पहले जहाँ केवल दो विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच या जर्मन) तक सीमित थीं, अब हिंदी, संस्कृत, उर्दू जैसे विकल्पों के साथ-साथ फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश जैसी विदेशी भाषाओं को भी चुना जा सकेगा। इससे विशेष रूप से उन छात्रों को लाभ मिलेगा जो अनुप्रयुक्त विज्ञान, प्रौद्योगिकी या अंतरराष्ट्रीय व्यापार जैसे क्षेत्र में आगे बढ़ने की इच्छा रखते हैं। नई नीति के अनुसार, वर्तमान कक्षा दस के विद्यार्थियों को इस बदलाव से कोई दिक्कत नहीं होगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि कक्षा दस के छात्रों को इस नई संभावना का लाभ नहीं मिलेगा और वे अपनी मौजूदा भाषा चयन को जारी रख सकते हैं। इस कदम का उद्देश्य विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रवाह को बाधित न करना है, जबकि नई कक्षाओं में प्रवेश करने वाले छात्रों को अधिक विकल्प प्रदान करना है। शिक्षा विशेषज्ञों ने इस परिवर्तन का स्वागत किया है, क्योंकि यह भाषा शिक्षण को अधिक बहुमुखी बनाता है और विद्यार्थियों को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार करता है। साथ ही कुछ निजी विद्यालयों ने इस नीति पर सवाल उठाते हुए कहा है कि भाषा चयन के लिए पर्याप्त संसाधन और योग्य शिक्षक उपलब्ध कराना आवश्यक होगा। इन चुनौतियों के बावजूद, सीबीएसई ने आश्वासन दिया है कि सभी आवश्यक शैक्षणिक समर्थन और प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी, जिससे इस नई नीति का कार्यान्वयन सुगम हो सके। निष्कर्षस्वरूप, सीबीएसई की इस पहल से मध्य विद्यालय में भाषा शिक्षा का परिदृश्य परिवर्तनशील हो गया है। दो विदेशी भाषा विकल्पों के माध्यम से छात्रों को अपने रुचियों के अनुसार भाषा चुनने की स्वतंत्रता मिलने से न केवल उनकी शैक्षणिक यात्रा समृद्ध होगी, बल्कि उन्हें भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के लिए भी तैयार किया जा सकेगा। यह बदलाव शिक्षा प्रणाली में लचीलापन लाने और विद्यार्थियों को व्यापक ज्ञान-आधार प्रदान करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।