📰 Kotputli News
Breaking News: इंडस जल संधि के प्रभाव से पाकिस्तान में गंभीर जल संकट: सिंध और बलूचिस्तान धूँधले पानी से जूझ रहे हैं
🕒 2 hours ago

इंडस जल संधि के संभावित टूटने के बाद पाकिस्तान में जल वितरण का संतुलन बिगड़ गया है, जिससे देश के प्रमुख दो प्रांत—सिंध और बलूचिस्तान—भारी जल संकट का सामना कर रहे हैं। इन दोनों क्षेत्रों की सिंचाई प्रणाली में पानी की आपूर्ति में अचानक कटौती ने न केवल कृषि उत्पादन बल्कि आम लोगों की दैनिक जीवनशैली को भी प्रभावित किया है। सिंध में स्थित प्रमुख इराकी जल अधिकार (IRSA) सदस्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली सिंध जल प्राधिकरण ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया है, जबकि बलूचिस्तान में पॉट फीडर नहर की जल आपूर्ति में 58 प्रतिशत की घटावट ने गंभीर सूखे के लक्षण पेश किए हैं। पाकिस्तान के कृषि प्रधान क्षेत्रों में से एक, सुकर बेज़ के पास स्थित सुख्कुर बाँध में भी पानी की कमी स्पष्ट तौर पर देखी जा रही है। यहाँ की जल धारा में कमी के कारण खरीफ़ फसल की पैदावार पर सीधा असर पड़ रहा है, जिससे किसानों में आर्थिक उथल-पुथल बढ़ी है। इस संकट को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुराद सिद्दीकी ने तत्कालीन प्रधान मंत्री शिहाब ज़ुल्फिकर अराफ़त को लिखित आवेदन किया है, जिसमें जल आपूर्ति को पुनर्स्थापित करने की मांग की गई है। उनका मानना है कि जल वितरण में हुई गिरावट इंडस जल संधि के कट्टरपंथी सिद्धांतों के परिणामस्वरूप हुई है, जिसे अब पुनर्विचार करने की जरूरत है। बलूचिस्तान में जल कमी का सबसे बड़ा कारण पॉट फीडर नहर से पानी की सप्लाई में भारी कटौती है, जिससे इस क्षेत्र के कई गांवों में किसान पानी के बिना फसल नहीं बो सकते। इस कमी ने न केवल कृषि को प्रभावित किया है, बल्कि स्थानीय जल जीव विज्ञान और जलवायु संतुलन को भी बिगाड़ दिया है। वहीं सिंध में जल अधिकार अधिकारियों के भीतर मतभेद उभरे हैं, जहाँ कुछ सदस्य पानी का वितरण समानुपाती नहीं करने का दोषी ठहराया गया है, और उनके हटाने की मांग की जा रही है। यह संघर्ष न केवल प्रांतीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी जल नीतियों के पुनर्समीक्षा को प्रेरित कर रहा है। इन समस्याओं के समाधान हेतु विशेषज्ञों ने कई उपाय सुझाए हैं। सबसे पहले, मौजूदा जल वितरण प्रणाली की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित करने की सलाह दी गई है। द्वितीय, जल संरक्षण के लिए लघु स्तर पर जलसंरक्षण परियोजनाओं को लागू करने और किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। तृतीय, इंडस जल संधि के पुनर्विचार में दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित कर, पानी के अनुचित उपयोग को रोकने के लिए नई बाध्यताएँ तय करनी चाहिए। संक्षेप में, इंडस जल संधि से उत्पन्न जल आपूर्ति में कमी ने पाकिस्तान के प्रमुख प्रांतों में गंभीर सामाजिक-आर्थिक चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। सिंध और बलूचिस्तान दोनों को जल के समान वितरण, प्रभावी जल प्रबंधन और नीति सुधार की तात्कालिक आवश्यकता है। यदि समय पर उचित कदम नहीं उठाए गए तो यह संकट न केवल कृषि उत्पादन को बल्कि राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा को भी खतरे में डाल सकता है। इसलिए, सरकार, विशेषज्ञ और स्थानीय समुदायों को मिलकर ठोस समाधान खोजने और जल संरक्षण के प्रति सामूहिक जागरूकता बढ़ाने की दिशा में काम करना अनिवार्य हो गया है।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 13 Jun 2026