संयुक्त राज्य के प्रतिनिधि माइकल रुबियो ने हाल ही में नई दिल्ली के विदेश मंत्री सचिन जाईशंकर को लिखित संदेश में स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमस्र जलडमरूमध्य में अमेरिकी नाकाबंदी को तोड़ने वाले किसी भी जहाज़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह बयान भारतीय समुद्रीकर्मियों पर हुए दुर्दंत हमले के कुछ ही दिनों बाद आया, जब इराकी जलडमरूमध्य में अमेरिकी नियंत्रित ड्रोन ने दो भारतीय नौजवानों की मौत का कारण बना। रुबियो ने अपने पत्र में यह भी जोड़ा कि अगर कोई जहाज़ अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करता है तो उसे तुरंत रोकना होगा, क्योंकि यह न केवल अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का उल्लंघन है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को भी कमजोर करता है। इन्हीं दिनों में, विदेश मंत्रालय ने नयी स्थिति को गंभीरता से दर्ज किया और जाईशंकर ने इस घटना पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी हथियारों के अनियंत्रित उपयोग के खिलाफ कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि एक सिविल जहाज़ पर किए गए इस हमले को "अन्यायपूर्ण" तथा "अअनुपालन" बताया और कहा कि भारत अत्यधिक चिंतित है। भारत‑संयुक्त राज्य के बीच रणनीतिक सहयोग के बावजूद, इस तरह के क्षैतिज कदमों से दो देशों के बीच विश्वास में दरार आ सकती है। रुबियो ने पुनः दोहराया कि इज़राइल‑फ़िलिस्तीन संघर्ष और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, हमस्र जलडमरूमध्य में तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की धारा को नियंत्रित करने के लिए नाकाबंदी लागू करना आवश्यक है। उन्होंने कहा, "यदि कोई भी जहाज़ इस नाकाबंदी को तोड़ता है, तो उसे तुरंत रोकना ही आवश्यक है, चाहे वह किसी भी देश का ही क्यों न हो।" इस संदेश के साथ वह भारत को भी इस नीतियों को सुदृढ़ करने का आग्रह कर रहे हैं, जिससे क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे। भारतीय अधिकारियों ने इसे एक चेतावनी के रूप में भी देखा है कि भविष्य में अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों की अनदेखी करने पर आर्थिक व रणनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। जाईशंकर ने कहा कि भारत अपने समुद्री कर्मियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और इस मामले में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी बात रखेगा। साथ ही, उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भारत हमेशा वैश्विक समुद्री सुरक्षा में सहयोगी रहा है और नाकाबंदी जैसे कदमों का पालन करने के लिए तैयार है, बशर्ते कि वह अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के अनुरूप हों। आगे देखते हुए, इस घटना ने वैश्विक स्तर पर समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा प्रवाह और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के पारस्परिक संबंधों पर नई चर्चा को जन्म दिया है। विश्व की बड़ी शक्ति अमेरिका और भारत दोनों को अब इस तंज़ीनों को सुलझाने के लिए संवाद व कूटनीति को प्राथमिकता देनी होगी, ताकि समुद्र में अनावश्यक तनाव न बढ़े और व्यापारी जहाज़ों की आवाजाही सुरक्षित रहे।