अमेरिका और भारत के बीच strategic दोस्ती को लेकर अक्सर बात होती है, पर ओमान के समुद्री क्षेत्र में हुए एक भयंकर हमले में तीन भारतीय नौसैनिकों की मौत के बाद शांती और सहयोग की आशा टूट गई है। ५ जून को ओमान के जलक्षेत्र में हुए एक मारक अमेरिकी हवाई हमले में मालवाहक जहाज पर सवार तीन भारतीय नाविक मारे गए। इस त्रासदी पर भारत के विदेश मंत्री शशि थरूर ने तीखे शब्दों में अमेरिकी सरकार को ‘दोस्त’ कहकर भी कोई संवेदना न दिखाने की निंदा की, और इस घटना को "गहरी चौंकाने वाली" बताया। थरूर ने कहा कि भारत ने तुरंत इस मामले की कूटनीतिक जांच की मांग की, जबकि अमेरिकी प्रतिनिधियों ने इस बधाई के लिये कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। यह हमले का समय यूरोप और मध्य-पूर्व में तेल और ऊर्जा की आपूर्ति को लेकर तनाव के बीच आया है, जब अमेरिकी नौसेना के एक मारकट विमान ने डॉरियास क्षेत्र में स्थित एक कंटेनर जहाज पर अचानक हमला किया। भारत ने तुरंत अपने विदेश मंत्रालय के माध्यम से अमेरिका से आधिकारिक स्पष्टीकरण और माफी की मांग की। हालांकि, अमेरिका ने इस घटना पर आधिकारिक तौर पर कोई शोक संदेश नहीं भेजा, जिससे भारतीय जनता और राजनीतिक वर्ग में गुस्सा और निराशा की लहर दौड़ गई। कई भारतीय नौसैनिक परिवारों ने अपनी पीड़ा को शब्दों में बयां किया और दो देशों के बीच के मिलनसार रिश्ते को चुनौती देते हुए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को संवेदनशील बना दिया। भारत के विदेश मंत्री ने इस अवसर पर अमेरिकी राष्ट्रपति वैरन को लिखी पत्र में भारतीय नाविकों के परिवारों को शोक व्यक्त करने और इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए त्वरित उपाय लेने की अपील की। थरूर ने कहा, "जब हम दो देशों के बीच दोस्ती की बात करते हैं, तो हमें सामरिक सहयोग के साथ मानवीय संवेदना भी दिखानी चाहिए।" इस बात के जवाब में अमेरिकी प्रेसिडेंशियल प्रतिनिधि ने बाद में कहा कि यह हमला एक “ऑपरेशनल त्रुटि” थी और आगे की जांच करने की बात कही, पर शोक संदेश भेजने की बात नहीं की। देश के विभिन्न राजनीतिक वर्गों ने इस मामले पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। विपक्षी दलों ने सरकार पर दबाव डाला है कि वह अमेरिका के खिलाफ कूटनीतिक उपायों को सख्त करे और इस प्रकार के भविष्य में दोहराव को रोकने के लिये अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून को मजबूत करे। इसके साथ ही, भारतीय नौसेना ने भी अपने जहाज़ों की सुरक्षा को लेकर नई रणनीतियों की घोषणा की है और ओमान के साथ मिलकर समुद्री क्षेत्र में मौजूदा सुरक्षा ढांचे को पुनः जांचने का प्रस्ताव रखा है। अंत में कहा जा सकता है कि इस दुखद घटना ने दो देशों के बीच के रिश्ते में नए सवाल उठाए हैं। शाश्वत दोस्ती के साथ-साथ मानवीय संवेदना और कूटनीतिक सम्मान का भी बराबर महत्व है। यदि भविष्य में इस प्रकार की त्रासदियों को रोका नहीं गया, तो भारतीय जनता की नाराज़गी केवल बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की समुद्री सुरक्षा के प्रति असुरक्षा की छवि बन सकती है। इसलिए, यह आवश्यक है कि दोनों देशों के राजनेता इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर, संवाद व सहयोग के माध्यम से इस जलक्षेत्र में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करें।