राजस्थानभर में निकाय चुनावों के दूसरे चरण का मतदान 11 सितंबर को पूरा होने के बाद सियासी समीकरणों में तेजी से बदलाव आना शुरू हो गया है। मतदान समाप्त होने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों का पूरा ध्यान अपने विजयी पार्षदों और महत्वपूर्ण निर्दलीय उम्मीदवारों को एकजुट रखने पर केंद्रित हो गया है। चुनावी मैदान की गर्माहट अब गलियों और चौपालों से निकलकर सुरक्षित ठिकानों और रिसोर्ट्स की तरफ स्थानांतरित हो चुकी है।
ऐतिहासिक रूप से राजस्थान के स्थानीय निकायों के चुनावों में मतदान के बाद की राजनीति हमेशा से बेहद संवेदनशील और दिलचस्प रही है। स्थानीय स्तर पर बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल करने के लिए राजनीतिक दलों द्वारा पार्षदों को पाले में रखने की यह संस्कृति पुरानी प्रतिस्पर्धा का ही परिणाम है। क्रॉस-वोटिंग के डर और विपक्षी दलों द्वारा पार्षदों की खरीद-फरोख्त की आशंकाओं के चलते इस तरह की बाड़ाबंदी अब चुनावी प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा बनती जा रही है।
मतदान संपन्न होने के बाद राजनीतिक दलों के रणनीतिकार और वरिष्ठ नेता अपने-अपने आंकड़ों को दुरुस्त करने में जुट गए हैं। 14 सितंबर को मतगणना होनी है, जिससे ठीक पहले बोर्ड गठन के समीकरणों को साधना दोनों ही दलों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। इस दौरान रिसोर्ट्स और होटलों में ठहराव की यह राजनीति यह सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है कि चुनाव परिणाम आने तक कोई भी पार्षद संपर्क से बाहर न हो और दलगत निष्ठाएं पूरी तरह सुरक्षित रहें।
आम नागरिकों, स्थानीय व्यापारियों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस प्रकार की बाड़ाबंदी को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां राजनीतिक दल इसे अपनी जीत की रणनीति और सुरक्षात्मक उपाय करार देते हैं, वहीं आम जनता का मानना है कि इस प्रकार की गतिविधियों से स्थानीय विकास के वास्तविक मुद्दे पीछे छूट जाते हैं और पूरा ध्यान केवल सत्ता के समीकरणों को साधने पर केंद्रित हो जाता है।
कोटपूतली सहित राजस्थान के विभिन्न जिलों में इन सियासी गतिविधियों का सीधा असर स्थानीय स्तर पर देखने को मिल रहा है। स्थानीय नागरिक और कार्यकर्ता इस बात को लेकर चर्चा कर रहे हैं कि किस पार्टी को बहुमत मिलेगा और कौन सा निर्दलीय उम्मीदवार किंगमेकर की भूमिका निभाएगा। निकाय बोर्ड के गठन का असर सीधे तौर पर स्थानीय शहरी विकास, पेयजल, सड़क और अन्य बुनियादी नागरिक सुविधाओं पर पड़ने की पूरी उम्मीद है।
संभावित राजनीतिक तनाव और जोड़-तोड़ की संभावनाओं को देखते हुए प्रशासनिक और पुलिस तंत्र भी पूरी तरह सतर्क हो गया है। मतदान के बाद के इस संवेदनशील दौर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन द्वारा होटलों और रिसोर्ट्स के आसपास पैनी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके और शांतिपूर्ण माहौल कायम रहे।
भविष्य की तैयारियों और आगामी राजनीतिक गतिविधियों की बात करें तो सबकी निगाहें अब 14 सितंबर पर टिकी हैं, जिस दिन चुनाव के नतीजे घोषित किए जाएंगे। परिणाम सामने आने के तुरंत बाद बहुमत का असली गणित स्पष्ट होगा, जिसके आधार पर विभिन्न निकायों में अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया पूरी की जाएगी और राज्य के शहरी स्थानीय निकायों की तस्वीर साफ होगी।