कोटपूतली‑बहरोड़ जिले में शहरी निकाय चुनाव के दूसरे चरण के दौरान, बहरोड़ के एक बुजुर्ग नागरिक, जिनकी तबीयत हाल ही में बिगड़ी थी, स्थानीय अस्पताल से बाहर निकल कर निर्धारित मतदान केंद्र तक पहुँचे और अपना मतदान अधिकार प्रयोग किया। इस चुनाव में बहरोड़ नगर परिषद के साथ नीमराना और बर्डोद नगरपालिकाएँ भी शामिल हैं, जो 55 वार्डों में फैले 66,896 पंजीकृत मतदाताओं को 69 मतदान केंद्रों के माध्यम से मतदान का अवसर प्रदान कर रहे हैं। बुजुर्ग की इस दृढ़ संकल्प ने स्थानीय मीडिया में विशेष ध्यान आकर्षित किया है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मानवीय पक्ष उजागर हुआ है।
शहरी निकाय चुनाव 2022 के नगर सुधारों के बाद इस जिले में पहला बड़ा चुनावी आयोजन है, जिसमें वार्डों की संख्या बढ़ाई गई और नई शासन संरचनाएँ स्थापित की गईं। ऐतिहासिक रूप से, इस क्षेत्र में मतदान सहभागिता लगभग 55‑60 प्रतिशत रही है, परन्तु अतिरिक्त वार्डों के समावेश ने व्यापक भागीदारी की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। दूसरा चरण इस सप्ताह निर्धारित है, जो पहले चरण के बाद उत्तर भाग में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ था और कुछ लॉजिस्टिक चुनौतियों के बावजूद सुचारु रूप से चला।
लॉजिस्टिक पहलू से देखें तो, तीनों नगरपालिकाओं में 69 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं, प्रत्येक में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन, सुरक्षा कर्मी और सहायक स्टाफ मौजूद हैं। 66,896 पंजीकृत मतदाताओं का वितरण असमान है; बहरोड़ लगभग 38 प्रतिशत, नीमराना 32 प्रतिशत और बर्डोद शेष 30 प्रतिशत मतदाता प्रदान करता है। वरिष्ठ नागरिकों और विकलांग व्यक्तियों के लिए विशेष बसें चलाने की घोषणा जिला चुनाव अधिकारी ने की है। फिर भी, बुजुर्ग नागरिक का मामला यह दर्शाता है कि स्वास्थ्य आपातकाल और मतदान समय‑सारिणी के बीच वास्तविक चुनौतियाँ मौजूद हैं।
चुनाव अधिकारी ने बुजुर्ग की दृढ़ता की सराहना की और बेहतर समर्थन तंत्र की आवश्यकता को स्वीकार किया। "हमारे स्टाफ को गतिशीलता समस्याओं वाले मतदाताओं की सहायता के लिये प्रशिक्षित किया गया है, परन्तु व्यक्तिगत परिस्थितियों में अतिरिक्त प्रयास आवश्यक हो सकते हैं," जिला चुनाव अधिकारी ने संक्षिप्त बयान में कहा। निकटवर्ती स्वास्थ्य कर्मी ने बताया कि रोगी का रक्तचाप अस्थिर था, फिर भी उन्होंने मतदान करने की ठान ली, क्योंकि उन्होंने जीवन भर लोकतांत्रिक जिम्मेदारी को महत्व दिया है। मतदान केंद्र के पास के स्थानीय दुकानदारों ने कहा कि बुजुर्ग मतदाताओं की सहायता के कारण वहाँ भी हल्का भीड़ बढ़ी।
कोटपूतली‑बहरोड़ जिले पर इसका प्रभाव बहुआयामी है। आर्थिक रूप से, चुनाव अवधि ने परिवहन सेवाओं, सुरक्षा कंपनियों और चुनाव सामग्री आपूर्तिकर्ताओं के लिए अल्पकालिक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया है। सामाजिक रूप से, वरिष्ठ नागरिकों की भागीदारी की दृश्यता अन्य वृद्ध लोगों को गतिशीलता बाधाओं को पार कर मतदान करने के लिये प्रेरित कर सकती है। सामुदायिक संगठनों ने इस अवसर का उपयोग करके जागरूकता अभियानों की शुरुआत की है, जिससे मतदाताओं को मतदान केंद्रों पर उपलब्ध सहायता सेवाओं के बारे में जानकारी मिल सके।
घटना के प्रत्युत्तर में जिला प्रशासन ने समावेशी मतदान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। तीन प्रमुख मतदान केंद्रों में अतिरिक्त व्हीलचेयर‑अनुकूल बूथ स्थापित किए जा रहे हैं, और एक हेल्पलाइन शुरू की गई है जो स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं वाले मतदाताओं को स्वयंसेवकों से जोड़ती है। चुनाव आयोग के क्षेत्रीय कार्यालय ने भी निर्देश जारी किया है कि चिकित्सा आपातकालीन स्थितियों को तुरंत मतदान कर्मचारियों को सूचित किया जाए, जिससे आवश्यक होने पर मतदान समय में अस्थायी विस्तार किया जा सके।
आगे देखते हुए, शहरी निकाय चुनाव का अंतिम चरण अगले सप्ताह निर्धारित है, जिसमें जिले के शेष वार्डों पर मतदान होगा। अधिकारियों को उम्मीद है कि पिछले चरण की तुलना में मतदान प्रतिशत थोड़ा अधिक रहेगा, क्योंकि बुजुर्ग नागरिक की कहानी ने जन जागरूकता को बढ़ावा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समावेशी उपायों पर निरन्तर जोर न केवल भागीदारी दर को बढ़ाएगा, बल्कि राजस्थान के भविष्य के चुनावों के लिये एक मानक स्थापित करेगा।