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राष्ट्रपति कलाम ने किया था सम्मानित, सौ प्रतिशत साक्षरता और पक्षी सेवा से रोशन है झुंझुनूं का यह गांव

झुंझुनूं जिले का लगभग 250 साल पुराना ऐतिहासिक बख्तावरपुरा गांव अपनी सौ प्रतिशत साक्षरता और अनूठी परंपराओं के लिए जाना जाता है। वर्ष 2007 में राजस्थान का पहला निर्मल गांव घोषित इस क्षेत्र को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा सम्मानित किया गया थ

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Kotputli News प्रकाशित: 03 Nov 2026, 06:30 AM
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राष्ट्रपति कलाम ने किया था सम्मानित, सौ प्रतिशत साक्षरता और पक्षी सेवा से रोशन है झुंझुनूं का यह गांव
राष्ट्रपति कलाम ने किया था सम्मानित, सौ प्रतिशत साक्षरता और पक्षी सेवा से रोशन है झुंझुनूं का यह गांव फोटो आभार: News18 Rajasthan State Wire
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राजस्थान के सांस्कृतिक रूप से समृद्ध झुंझुनूं जिले में स्थित बख्तावरपुरा एक ऐसा ऐतिहासिक गांव है, जो अपनी प्रगतिशील सोच, उत्कृष्ट सामाजिक अनुशासन और अमिट सांस्कृतिक विरासत के लिए पूरे क्षेत्र में विशिष्ट पहचान रखता है। लगभग 250 वर्ष पुराना यह गांव सदियों से अपनी पारंपरिक मर्यादाओं को निभाते हुए आधुनिक विकास के पथ पर अग्रसर रहा है। इस क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक पहचान ने साधारण ग्रामीण सीमाओं को पार करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग छाप छोड़ी है।

बख्तावरपुरा गांव का ऐतिहासिक सफर सामूहिक प्रयासों, स्वच्छता अभियानों और शिक्षा के प्रति समर्पण की एक अनूठी गाथा रहा है। गांव के निवासियों के अथक परिश्रम और दूरदर्शिता का ही परिणाम था कि वर्ष 2007 में इस ऐतिहासिक बस्ती को राजस्थान का पहला निर्मल गांव घोषित किया गया। इस गौरवशाली उपलब्धि ने ग्रामीण स्वच्छता और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया, जिसकी गूंज पूरे राज्य में सुनाई दी।

इस असाधारण सामाजिक उपलब्धि और स्वच्छता के प्रति प्रतिबद्धता का सम्मान करते हुए देश के महान वैज्ञानिक एवं तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने इस गांव को विशेष रूप से सम्मानित किया था। राष्ट्रपति का यह सम्मान बख्तावरपुरा के निवासियों के लिए अत्यंत गौरव का क्षण था, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि यदि ग्रामीण समाज ठान ले तो वह बड़े से बड़े बदलाव को अपनी बदौलत जमीन पर उतार सकता है। इस राष्ट्रीय सम्मान ने आसपास के अन्य गांवों को भी स्वच्छता और विकास की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

बख्तावरपुरा की सफलता का एक अन्य सबसे महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक स्तंभ इसकी सौ प्रतिशत साक्षरता दर है। गांव के प्रत्येक नागरिक को शिक्षित बनाने के लिए जो प्रयास किए गए, उन्होंने यहां की पीढ़ियों को बौद्धिक रूप से सशक्त किया है। शत-प्रतिशत साक्षरता के इस आंकड़े ने यह प्रमाणित कर दिया है कि बुनियादी सुविधाओं और सामूहिक इच्छाशक्ति के बल पर ग्रामीण परिवेश में भी शत-प्रतिशत शिक्षा के लक्ष्य को आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।

शैक्षणिक और प्रशासनिक सफलताओं के अलावा, यह गांव अपनी मानवीय और पर्यावरणीय संवेदनाओं के लिए भी गहराई से जाना जाता है। बख्तावरपुरा में आज भी पक्षियों की सेवा करने की एक सौ साल पुरानी परंपरा पूरी निष्ठा के साथ निभाई जा रही है। यहां के लोग प्रतिदिन नियम से हजारों पक्षियों को दाना डालते हैं, जो जीव-दया और पर्यावरण के प्रति उनके अगाध प्रेम को रेखांकित करता है। यह परंपरा इस बात का प्रमाण है कि विकास की अंधी दौड़ के बीच भी इस गांव ने अपनी मानवीय संस्कृति और परंपराओं से कभी समझौता नहीं किया है।

झुंझुनूं जिले के प्रशासनिक हलकों और स्थानीय निकायों में बख्तावरपुरा को एक आदर्श मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। सरकारी अधिकारी और सामाजिक संगठन इस गांव की कार्यप्रणाली का अध्ययन करते हैं ताकि यह समझा जा सके कि कैसे पारंपरिक मूल्यों को बनाए रखते हुए प्रशासनिक योजनाओं को शत-प्रतिशत सफल बनाया जा सकता है। स्थानीय प्रशासन द्वारा भी इस गांव की स्वच्छता व्यवस्था और सामाजिक समरसता को बनाए रखने के लिए निरंतर प्रोत्साहन दिया जाता है।

भविष्य की ओर देखते हुए, बख्तावरपुरा के निवासी अपनी इस गौरवशाली विरासत को सुरक्षित रखते हुए सतत विकास के नए आयाम छूने के लिए संकल्पबद्ध हैं। गांव की युवा पीढ़ी और बुजुर्गों में इस बात को लेकर पूरा उत्साह है कि वे अपनी साक्षरता, स्वच्छता और पक्षी सेवा की इस परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पूरी निष्ठा के साथ पहुंचाएंगे। यह लगभग 250 वर्ष पुराना गांव आज भी देश के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बना हुआ है।

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सत्यापित पत्रकार

कोटपूतली-बहरोड़ जिला संवाददाता एवं संपादकीय डेस्क

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यह समाचार रिपोर्ट कोटपूतली न्यूज़ संपादकीय आचार संहिता के तहत प्रकाशित की गई है। यदि आपको इसमें कोई तथ्यात्मक त्रुटि प्रतीत हो तो सुधार हेतु संपर्क करें।

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