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दौसा में खाद वितरण के दौरान किसानों का हंगामा, डीएपी के साथ एक्सपायरी नैनो यूरिया थोपने का आरोप

दौसा जिला मुख्यालय पर खाद वितरण के दौरान किसानों ने अनियमितताओं के खिलाफ जोरदार हंगामा किया। किसानों ने आरोप लगाया कि उन्हें डीएपी के साथ जबरन 2023 की पैकेजिंग वाली एक्सपायरी नैनो यूरिया दी गई और 600 रुपए तक अतिरिक्त वसूले गए। यह स्थिति कृषि आपूर्ति श्रृं

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Kotputli News प्रकाशित: 08 Oct 2026, 03:31 AM
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दौसा में खाद वितरण के दौरान किसानों का हंगामा, डीएपी के साथ एक्सपायरी नैनो यूरिया थोपने का आरोप
दौसा में खाद वितरण के दौरान किसानों का हंगामा, डीएपी के साथ एक्सपायरी नैनो यूरिया थोपने का आरोप फोटो आभार: News18 Rajasthan State Wire
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दौसा जिला मुख्यालय पर खाद वितरण प्रक्रिया के दौरान उस समय भारी हंगामा मच गया जब स्थानीय किसानों ने गंभीर अनियमितताओं के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कृषि पोषक तत्वों की समय पर और उचित उपलब्धता पर निर्भर रहने वाले किसानों ने स्थानीय वितरण व्यवस्था के तौर-तरीकों पर गहरा रोष व्यक्त किया। इस प्रदर्शन ने कृषि आपूर्ति प्रबंधन को गंभीर सार्वजनिक जांच के घेरे में ला दिया है, क्योंकि किसानों ने प्रशासनिक निगरानी के बीच कथित रूप से चल रही धोखाधड़ी की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

इस क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से डीएपी जैसे प्राथमिक उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता पर टिकी हुई है, जो आगामी फसल पैदावार के लिए अनिवार्य माने जाते हैं। पिछले कुछ सत्रों के दौरान, दौसा और आसपास के प्रशासनिक क्षेत्रों के किसानों ने लगातार व्यवस्थित किल्लतों और जबरन वितरण के तौर-तरीकों की शिकायत की है। इन ऐतिहासिक चुनौतियों ने किसानों को हमेशा से उन बंडल्ड उत्पादों को स्वीकार करने के लिए मजबूर किया है, जो बुवाई के महत्वपूर्ण समय में उनके सीमित वित्तीय संसाधनों पर भारी दबाव डालते हैं।

प्रदर्शन के दौरान किसानों द्वारा दिए गए विस्तृत बयानों के अनुसार, वितरण अधिकारियों ने कथित तौर पर उन्हें डीएपी के निर्धारित कोटे के साथ जबरन नैनो यूरिया खरीदने के लिए मजबूर किया। इस अनिवार्य बंडलिंग के माध्यम से किसानों पर जो वित्तीय बोझ डाला गया, उसने उन्हें और अधिक आक्रोशित कर दिया, क्योंकि प्रति लेनदेन 600 रुपए तक की अतिरिक्त वसूली की गई। इस तरह की भारी वित्तीय वसूली उन सीमांत किसानों को सीधे तौर पर प्रभावित करती है जो बढ़ती इनपुट लागत और अनिश्चित मौसम के खिलाफ लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

वित्तीय शोषण के अलावा गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरणीय चिंताओं को सामने लाते हुए, प्रदर्शनकारी किसानों ने वितरित नैनो यूरिया की बोतलों की भौतिक रूप से जांच की और चौंकाने वाली गड़बड़ियों का खुलासा किया। पैकेजिंग विवरण से स्पष्ट रूप से पता चला कि नैनो यूरिया की बोतलें वर्ष 2023 की थीं, जो वर्ष 2025 तक पूरी तरह से एक्सपायर हो चुकी थीं। एक्सपायरी कृषि इनपुट वितरित करने से न केवल मेहनतकश किसान समुदाय की गाढ़ी कमाई ठगी जाती है, बल्कि पूरे क्षेत्र की मिट्टी के स्वास्थ्य और फसल उत्पादकता को भी गंभीर खतरा पैदा होता है।

इस तरह की आपूर्ति श्रृंखला में हेराफेरी के परिणाम दौसा की तात्कालिक सीमाओं से कहीं आगे तक फैलते हैं, जो कोटपूतली-बहरोड़ सहित पड़ोसी ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को भी सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। पड़ोसी जिलों के स्थानीय कृषि नेटवर्क भी इसी तरह की कमजोरियों को साझा करते हैं, जिससे वे शोषक वितरण सिंडिकेट्स और धोखाधड़ी वाली आपूर्ति प्रथाओं के प्रति समान रूप से संवेदनशील हो जाते हैं। पहले से ही लॉजिस्टिक बाधाओं से जूझ रही क्षेत्रीय कृषि अर्थव्यवस्था को उस समय गहरा आघात पहुंचता है जब अवैध मुनाफे के लिए आवश्यक पोषक तत्वों के साथ खिलवाड़ किया जाता है।

जैसे-जैसे जिला मुख्यालय पर जनआक्रोश बढ़ा, स्थानीय प्रशासनिक और कृषि विभाग के अधिकारियों पर शिकायतों का पारदर्शी तरीके से समाधान करने का भारी दबाव बन गया। किसानों ने वितरण नेटवर्क की तुरंत जांच करने, दोषी आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने और एक्सपायरी उत्पादों की अनिवार्य बंडलिंग को पूरी तरह से बंद करने की मांग की। परेशान किसान आबादी के बीच विश्वास बहाल करने के लिए अब प्रशासनिक निकायों द्वारा उर्वरक इन्वेंट्री का गहन ऑडिट किए जाने की उम्मीद है।

भविष्य की ओर देखते हुए, किसान संघों और किसान प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन द्वारा त्वरित सुधारात्मक उपाय लागू नहीं किए गए तो वे अपने आंदोलन का दायरा और बढ़ाएंगे। आगामी परिचालन समयसीमा के तहत यह आवश्यक है कि उर्वरक डिपो की कड़ी निगरानी की जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसानों को मानकीकृत दरों पर शुद्ध इनपुट मिल सकें। दौसा और आसपास के जिलों में कृषि आजीविका की रक्षा के लिए पारदर्शी वितरण तंत्र और सख्त सांविधिक निगरानी ही वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बनी हुई है।

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