सीकर जिले में आयोजित प्रसिद्ध बेरी पशु मेले में लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिससे पूरा परिसर ग्रामीण संस्कृति और व्यापार का केंद्र बन गया है। यह मेला पांच अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा और इस दौरान यहां आने वाले लोगों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। राजस्थान के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन का हिस्सा बनने पहुंचे हैं।
ऐतिहासिक रूप से इस क्षेत्र के पशु मेले ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुधन संरक्षण में रीढ़ की हड्डी माने जाते रहे हैं। बेरी पशु मेले की पुरानी परंपरा रही है कि यह विभिन्न क्षेत्रों के पशुपालकों और व्यापारियों को एक मंच पर लाता है। समय के साथ यह मेला केवल खरीद-फरोख्त का केंद्र न रहकर एक सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले चुका है, जो ग्रामीण जीवन शैली को दर्शाता है।
इस वर्ष मेले में राजस्थान के अलावा पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में पशुपालक पहुंचे हैं। मेले में पशुओं की खरीद-फरोख्त का सिलसिला जोरों पर है, जहां व्यापारी और पशुपालक अपने पशुओं के सौदे कर रहे हैं। इस व्यावसायिक गतिविधि के कारण स्थानीय स्तर पर आर्थिक सुगबुगाहट तेज हो गई है और चारों ओर उत्सव का माहौल है।
मेले के दौरान ऊंट 'बादल' और घोड़ी 'सोनूड़ी' के शानदार नृत्य व करतब मुख्य आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन दोनों की प्रस्तुतियां देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ जमा हो जाती है। उनके द्वारा किए गए अनोखे करतबों ने मेले में मौजूद हर एक व्यक्ति का मन मोह लिया है और यह पूरे आयोजन की चर्चा का मुख्य विषय बन गया है।
इस मेले में नेकीराम छावसरी और मांगीलाल पचार के प्रशिक्षित पशुओं ने जमकर वाहवाही बटोरी है। उनके पशुओं द्वारा दिखाए गए अनुशासन और कला कौशल ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं को प्रशिक्षित करने की कला कितनी उन्नत है। उपस्थित दर्शकों और अन्य पशुपालकों ने नेकीराम छावसरी और मांगीलाल पचार के इस प्रयास की खुलकर सराहना की है।
दिनभर की व्यस्तता और पशुओं के व्यापार के बाद, मेले में रात के समय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। ये सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आगंतुकों और व्यापारियों का भरपूर मनोरंजन कर रही हैं, जिससे मेले का माहौल और अधिक जीवंत हो जाता है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न राज्यों से आए लोग एक-दूसरे की संस्कृति से भी रूबरू हो रहे हैं।
यह मेला पांच अक्टूबर को अपने समापन की ओर बढ़ेगा, जिसके तहत एक विशेष समारोह में पशुपालकों को सम्मानित किया जाएगा। आयोजकों और प्रशासन द्वारा मेले के सफल समापन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं ताकि आने वाले सभी पशुपालकों और मेहमानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।