जबलपुर में बर्गी बांध पर आयोजित क्रूज यात्रा के दौरान घटित दुखद दुर्घटना ने पूरे देश को शोक में डुबो दिया। शाम को जब नाव उल्टी और कई यात्री डूब गए, तो सोशल मीडिया पर एक तीव्रतम तस्वीर फेमस हुई। वह थी एक माँ और उसके छोटे बेटे की, जो एक-दूसरे को कसकर पकड़ रहे थे, आँसू भरी आँखों से मदद के लिये पुकारते हुए दिखाए गए थे। इस शोकाकुल झलक को देखकर इंटरनेट पर करुणा की लहर दौड़ी, लेकिन कुछ ही देर में ही इस फोटो की सही-सही असली होने पर सवाल उठने लगे। जबलपुर जिला संग्रहालय के कोलेटर ने कहा कि वायरल हुई इस तस्वीर का स्रोत किसी सरकारी एजेंडा से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह एक फ़िल्म या विज्ञापन से ली गई स्टॉक इमेज है। उन्होंने बताया कि दुर्घटनास्थल पर कोई भी ऐसी फोटो नहीं ली गयी थी, जहाँ माँ-बेटा एक-दूसरे को पकड़ते दिखाए गए हों। कोलेटर ने यह स्पष्ट किया कि घटना स्थल पर निकाले गये बहुजली ग्रेमी सूरजलाई द्वारा प्रदान किए गये आधिकारिक सुरक्षा कैमरे की फुटेज में ऐसी कोई छवि नहीं दिखती। इसके अतिरिक्त, पीड़ित परिवारों की ओर से भी इस झूठी तस्वीर को लेकर गहरी निराशा व्यक्त की गई, क्योंकि इससे वास्तविक पीड़ितों के शोक पर अनावश्यक दबाव बना। दुर्घटना के बाद, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई माध्यमों ने तत्काल救助 प्रयासों की तस्वीरें और वीडियो दिखाए। यात्री पहले जीवन रक्षक जाकिट पहने लोगों की मदद से तैरते हुए पकड़े गये, जबकि कई लोगों को बचाव दल ने तुरंत ही नाव से बाहर निकाल दिया। किन्तु उत्तर प्रदेश के कुछ संवाददाता ने बताया कि बचाव के दौरान भी भीड़भाड़ और अराजकता ने कई लोगों की जान को खतरे में डाल दिया। खाना‑पानी की कमी, झंडों की कमी और बेतरतीब ढंग से चल रहे बचाव कार्य ने स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया। अंत में, इस दुखद घटना ने फिर से यह सवाल उठाया है कि बड़े पैमाने पर पर्यटन और जलपर्यटन के संचालन में सुरक्षा के मानक कितने कड़े हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसी नौकायन यात्राओं के लिए स्थानीय प्रशासन को सख्त लाइसेंसिंग, पर्याप्त जीवन रक्षा उपकरण और प्रशिक्षित कर्मियों की व्यवस्था अनिवार्य करनी चाहिए। साथ ही, सोशल मीडिया पर फैलने वाले गलत एवं प्रोपेगंडा फोटो और वीडियो का तुरंत सत्यापन कर, जनता को सही जानकारी प्रदान करना भी जिम्मेदारी बन गया है। बर्गी बांध की इस त्रासदी ने हमें याद दिलाया कि जीवन की कीमत को कभी भी आँकड़ा नहीं बनाया जा सकता, और हर क्षण सुरक्षा को प्रथम प्राथमिकता देना चाहिए।