इज़रायली-ईरानी युद्ध के 64वें दिन में वैश्विक स्तर पर तनाव की स्थिति लगातार बढ़ रही है। इस अवधि में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान द्वारा प्रस्तुत नई शर्तों को असंतोषजनक मानते हुए उन्हें outright रूप से खारिज कर दिया है। ट्रम्प ने दो स्पष्ट विकल्पों पर प्रकाश डाला: या तो ईरान के मिलिशिया इकाइयों को पूरी तरह नष्ट किया जाए, या फिर एक समझौते के तहत शर्तों में पर्याप्त बदलाव लाए जाएँ। इस निर्णय ने पहले ही एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों को गहरी चिंतित कर दिया है, जो इस संघर्ष के आर्थिक और सुरक्षा प्रभावों से प्रभावित हो सकते हैं। ईरान ने स्वयं को नई प्रस्ताव सौंपी है, जिसमें वह अमेरिकी सैन्य हटाने, वार्ता के माध्यम से आर्थिक प्रतिबंधों में कमी और मध्यस्थ देशों के सहयोग को प्रमुखता देता है। इस प्रस्ताव को पाकिस्तान और दुबई के मध्यस्थों को भी प्रस्तुत किया गया, लेकिन ट्रम्प ने इसे अपर्याप्त बताया। उनका मानना है कि ईरान का नया प्रस्ताव न तो सुरक्षा गारंटी देता है, न ही वैध प्रतिपूर्ति का उल्लेख करता है। इस वजह से उन्होंने दो विकल्प प्रस्तुत किए: या तो ईरानी फौजियों को पूरी तरह से नष्ट किया जाए, या फिर बहुत ही कठोर शर्तों के साथ नया समझौता किया जाए, जिसमें अमेरिकी सैनिकों की वापसी और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की पुनर्स्थापना शामिल होगी। ट्रम्प के इस कदम से अंतरराष्ट्रीय मंच पर कई प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों ने एक संतुलित समाधान की मांग की, जबकि हिंदुस्तान टाइम्स ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस स्थिति को द्विआधारी मॉडल में बदल दिया है, जिससे मध्य पूर्व में शांति प्रक्रिया और अधिक जटिल हो सकती है। वाशिंगटन की नीतियों को लेकर टिप्पणी करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि यह रणनीति संभावित रूप से ईरान को अधिक आक्रामक बना सकती है और इस क्षेत्र में आगे बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को कमजोर कर सकती है। वर्तमान में ईरान ने पुनः वार्ता के लिए कुछ बदलावों के साथ नई शर्तें पेश की हैं, जिसमें वाई-फाई प्रक्रिया के माध्यम से पैमाने पर प्रतिबंधों को घटाने की इच्छा जाहिर की गई है। लेकिन अमेरिकी प्रशासन की दृढ़ता अब तक इस दिशा में नहीं दिखी, और ट्रम्प ने इस बात पर जोर दिया है कि "यदि ईरान ने अपनी शर्तों में पर्याप्त बदलाव नहीं किया, तो सैन्य विकल्प ही बचेगा"। इस निर्णय से मध्य पूर्व में अस्थिरता की स्थिति और गहरी हो सकती है, और संभावित रूप से बड़े अर्थव्यवस्थाओं पर भी असर पड़ेगा। निष्कर्षतः, ट्रम्प का ईरान के प्रस्ताव को खारिज करना और दो विकल्प पेश करना इस संघर्ष को नई दिशा दे रहा है। जहाँ एक ओर कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं कम हो रही हैं, वहीं सैन्य हस्तक्षेप की घटती संभावना क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर नई चुनौतियां पैदा कर रही है। अब सवाल यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति को कैसे संभालता है और क्या कोई मध्यस्थता प्रक्रिया फिर से काम कर पाएगी, जिससे संघर्ष को शांति में बदल दिया जा सके।