पाकिस्तान ने हौबोलिया पर शत्रुतापूर्ण बंदी के बावजूद इरान के साथ जमीन पर छह नई व्यापारिक मार्गों को सक्रिय कर दिया है। इस कदम से गाजर समुद्र के रणनीतिक जलमार्ग होर्मुज़ की रोकथाम के कारण उत्पन्न हुई आपूर्ति संकट का एक वैकल्पिक समाधान सामने आ गया है। दोनों देशों ने इस सहयोग को अपनी आर्थिक और जलवायु सुरक्षा की दिशा में एक अहम मोड़ बताया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह कदम संयुक्त राष्ट्र तथा प्रमुख वैश्विक शक्तियों के बीच बहस का विषय बन गया है। इन छह मार्गों में मुख्यतः बधदा, घाग्रा, क्वालिंडर, सुआब, जाबर और खैराब के चारों ओर के रूट शामिल हैं, जो पाकिस्तान के दक्षिणी बिंदु को इरान के प्रमुख शहरों तेहरान और शीराज़ से जोड़ते हैं। इन रूटों के खुलने से तेल, गैस, रेशम और कृषि उत्पादों का मुक्त प्रवाह संभव हो सकेगा, जिससे दोनों देशों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की आशा है। साथ ही, इस व्यावासायिक विस्तार से पाकिस्तान को अपने औद्योगिक केंद्रों तक निर्यात‑आयात की नई लाइनों का लाभ मिलेगा, जबकि इरान को पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच आर्थिक जीवंतता का एक नया कंधा मिलेगा। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने इस कदम को "राष्ट्र की सार्वभौमिकता और आर्थिक आत्मनिर्भरता" का प्रतीक कहा और कहा कि इस प्रकार के रास्ते केवल व्यापार नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता को भी सुदृढ़ करेंगे। इरान के प्रधान मंत्री ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह उन देशों के लिए एक सच्चा श्रेय है जो वैश्विक शक्ति के दबाव के बिना अपने हितों की रक्षा करना चाहते हैं। फिर भी, अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इस कदम को अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रति एक प्रतिरोधी प्रतिक्रिया के रूप में पढ़ा है, जिससे अमेरिकी-इज़राइली गठबंधन के साथ तनाव में वृद्धि का सम्भावना बनती है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना सफल रहती है तो इससे न केवल दोनों देशों के बीच व्यापार में दशकों की वृद्धि होगी, बल्कि दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व के बीच नई सिल्क रोड का पुनरुद्धार भी हो सकता है। हालांकि, इस मार्ग की सुरक्षा, बुनियादी ढाँचे की उपलब्धता और स्थानीय जनसंख्या की सहमति जैसे मुद्दों को हल करने में समय लग सकता है। अभी के लिए, इस कदम ने दक्षिण एशिया की भू-राजनीतिक मानचित्र को पुनः लिखने की दिशा में एक स्पष्ट संकेत दिया है, जो आने वाले भविष्य में क्षेत्रीय संतुलन को बदल सकता है।