बीजेपी ने अपने आंतरिक दस्तावेज़ "कोरमंडल ब्लूप्रिंट" में दो प्रमुख राज्यों—पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु—को "अंतिम सीमाओं" के रूप में चिन्हित किया है। यह रणनीति पार्टी के वरिष्ठ कर्मचारियों ने तय किया है कि 2026 के आम चुनावों में इन क्षेत्रों में गहरी जड़ें जमा ली जाएँ। दस्तावेज़ के अनुसार, दोनों राज्यों में सामाजिक‑आर्थिक बदलाओं, जातीय गठबंधनों और भाषाई पहचान के मुद्दों को समझकर, बीजेपी का लक्ष्य वर्तमान सत्ता दलों को कमजोर करके अपना राजनैतिक मोर्चा विस्तारित करना है। पहला चरण, पश्चिम बंगाल, जहाँ कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस की गठबंधन ने दशकों तक सत्ता संभाली है, वहाँ भाजपा ने कई छोटे‑छोटे स्थानीय मंचों को सक्रिय कर, ग्रामीण विकास, बुनियादी ढाँचे और रोजगार के मुद्दों को प्रमुखता देने की योजना बनाई है। साथ ही, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मीडिया अभियानों के माध्यम से 'बांग्ला पहचान' को सुदृढ़ करते हुए, पार्टी ने गठबंधन के भीतर बिखराव पैदा करने की कोशिश की है। इस रणनीति के तहत, पार्टी ने कई महत्त्वपूर्ण नेताओं को क्षेत्रीय अभियानों में लगाकर, केन्द्रिय नीति‑निर्माण में बंगाल को अहम भूमिका देने का वादा किया है, जिससे उत्तरदायित्व की भावना उत्पन्न हो। दूसरी ओर, तमिलनाडु में भाजप ने "कोरमंडल ब्लूप्रिंट" के तहत आरम्भिक चरण में मतदान अधिकारी, ईवीएम और सुरक्षा संरचना की विस्तृत जाँच की है। 2026 के चुनाव में 3.4 लाख निर्वाचन कर्मियों और लाखों ईवीएम मशीनों को वितरण किया गया है, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही, पार्टी ने तमिलनाडु में 85 प्रतिशत रिकॉर्ड वोटर टर्नआउट को भी घनिष्ठ रूप से अध्ययन किया है। इस आँकड़े को लेकर कई विश्लेषकों ने कहा है कि यह उच्च टर्नआउट केवल सामाजिक जागरूकता नहीं, बल्कि गठबंधन के भीतर वैरची के संकेत भी हो सकते हैं। भाजपा ने इस प्रवृत्ति को अपने पक्ष में मोड़ने के लिये महिलाओं मतदाताओं को विशेष रूप से लक्षित किया है, क्योंकि पिछले चुनाव में महिलाएँ पुरुषों से अधिक सक्रिय दिखीं। भाजपा का यह नया ब्लूप्रिंट केवल चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि दीर्घकालिक राजनैतिक परिप्रेक्ष्य प्रदान करता है। इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर दोनो महाद्वीपों में भारतीय जनता पार्टी की पहचान को मजबूत करना है, जिससे भविष्य में राष्ट्रीय प्रमुखता के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर भी स्थायी बल बन सके। अंत में, समय ही बताएगा कि यह महत्त्वाकांक्षी योजना कितनी सफल रही, परन्तु स्पष्ट है कि 2026 के चुनावों में बंगाल और तमिलनाडु दोनों ही राज्यों में भारतीय राजनीति का रंगभेदन कई रंगों में बदलकर सामने आएगा।