नई दिल्ली: भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रविवार को कुजाख़स्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे, जहाँ उन्होंने शांती और सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सुरक्षा नीतियों को उजागर करने और क्षेत्रीय स्थिरता को सुनिश्चित करने के लक्ष्य से इस मुलाकात को बिखरे हुए पश्चिम एशिया के संघर्षों का भी विशेष महत्व था। राजनाथ सिंह ने अपने आगमन पर कहा कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच पारस्परिक समझ और सहयोग को मजबूत करना है, जिससे आतंकवाद, सीमा सुरक्षा और सशस्त्र संघर्ष जैसे चुनौतियों का सम्मिलित रूप से सामना किया जा सके। बिश्केक में हुए स्वागत समारोह में कई प्रमुख नेतृत्व व्यक्तियों ने भाग लिया, जिसमें रूस, चीन, ईरान, पाकिस्तान और अन्य दक्षिण एशियाई देशों के रक्षा मंत्री शामिल थे। बैठक के दौरान राजनाथ सिंह ने कई महत्वपूर्ण बिंदु उठाए। उन्होंने बताया कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में "कोई दोहरे मानदंड नहीं" अपनाए हैं और सभी आतंकवादी फ़ैशन पर एक समान कड़ा रुख अपना रहा है। इस सिलसिले में उन्होंने एससीओ के मंच पर पाकिस्तान के समर्थन वाले आतंकवादी जालों को नज़रअंदाज़ नहीं किया, बल्कि उन पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। इस दौरान उन्होंने इराक और अफग़ानिस्तान में चल रहे संघर्षों का हवाला देकर कहा कि इन क्षेत्रों में शांति स्थापित करने के लिए सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था अत्यावश्यक है। भारत ने अपने "ऑप सिंधूर" अभियान का भी उल्लेख किया, जिसमें सीमा के पार के आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने के लिए विशेष सैन्य कार्रवाई की गई थी। रक्षा मंत्रियों के बीच कई द्विपक्षीय मुलाक़ातें भी हुईं। राजनाथ सिंह ने चीन और रूस के समकक्षों के साथ गहन बातचीत की, जिसमें प्रमुख रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, संयुक्त अभ्यास और तकनीकी सहयोग के नए आयामों पर चर्चा हुई। दोनों देशों के साथ भारत ने सैन्य तकनीक में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और आपसी विश्वास को सुदृढ़ करने के कदमों को स्पष्ट किया। साथ ही, उन्होंने एशिया-प्रशांत में सुरक्षा माहौल को स्थिर रखने के लिए सामरिक सहयोग को और गहरा करने की भी इच्छा व्यक्त की। एससीओ टीम के प्रमुख बिंदु को देखते हुए, बैठक ने कई सार्थक प्रस्तुतियों को जन्म दिया। सदस्य देशों ने सीमा सुरक्षा, सामुद्रिक सुरक्षा और साइबर सुरक्षा जैसे व्यापक क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने का संकल्प जारी किया। राजनाथ सिंह ने इस मंच पर कहा कि भारत का लक्ष्य केवल अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा नहीं, बल्कि पूरे एससीओ क्षेत्र की शांति, स्थिरता और विकास के लिए रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करना है। इस प्रकार, बिश्केक में हुई एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक भारत के परराष्ट्र नीति में नई दिशा स्थापित करती है, जिससे भविष्य में क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना करने के लिए एक सुदृढ़ और सामूहिक मंच तैयार होगा। निष्कर्षतः, राजनाथ सिंह की बिश्केक यात्रा ने भारत को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संवाद में एक प्रमुख स्थान प्रदान किया है। एससीओ के मंच पर भारत ने न केवल आतंकवाद के खिलाफ साहसी रुख दिखाया, बल्कि द्विपक्षीय सहयोग को भी नई ऊँचाइयों पर पहुंचाया। इस प्रकार, यह एशिया-प्रशांत के सुरक्षा परिदृश्य में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है, जिससे भारत की रणनीतिक महत्ता और विश्व मंच पर उसकी आवाज़ और भी प्रबल होगी।