हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान, ओमान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से विश्व का एक बड़ा भाग तेल व्यापार गुजरता है, इसलिए इस समझौते पर वैश्विक बाजार और राजनयिक हलकों की नजर टिकी हुई है। सूत्रों के अनुसार तीनों पक्ष एक ऐसे प्रारूप पर सहमत होने के करीब हैं जो नौवहन की सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव को कम करने का रास्ता खोल सकता है। ईरान इस समझौते के माध्यम से जलडमरूमध्य में आने वाले जहाजों के यातायात पर नियंत्रण स्थापित करना चाहता है, जिससे उसकी क्षेत्रीय प्रभुता मजबूत हो। वहीं ओमान लंबे समय से मध्यस्थ की भूमिका निभाता आ रहा है और वह अपने जलसीमा अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने का इच्छुक है। अमेरिका की प्राथमिकता तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना और अपने सहयोगियों के ऊर्जा हितों की रक्षा करना है, लेकिन वह ईरान को अत्यधिक छूट देने से बचना चाहता है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार प्रस्तावित समझौते में ईरान को जलडमरूमध्य में प्रवेश करने वाले जहाजों की निगरानी और मार्गदर्शन का अधिकार दिया जा सकता है। इससे ईरान को नौसैनिक गतिविधियों पर अधिक नियंत्रण मिलेगा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय नौवहन नियमों का पालन भी अनिवार्य होगा। द गार्जियन की रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान और ओमान ने जलडमरूमध्य से गुजरने वाले मार्ग के निर्देशांकों पर सहमति व्यक्त की है, जो तकनीकी स्तर पर एक बड़ी प्रगति है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य शीघ्र नहीं खोला गया तो ईरान को बहुत कठोर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई, जिससे समझौते की तात्कालिकता और बढ़ गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप का रुख घरेलू राजनीति और सहयोगियों को आश्वस्त करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। निष्कर्षतः, हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर बन रहा यह समझौता क्षेत्रीय भू-राजनीति और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। यदि तीनों पक्ष अपने मतभेदों को दूर कर एक संतुलित समझौते पर पहुंचते हैं, तो यह न केवल तनाव कम करेगा बल्कि विश्व अर्थव्यवस्था को स्थिरता भी प्रदान करेगा। आने वाले दिनों में इस समझौते के अंतिम प्रारूप और उसके क्रियान्वयन पर सभी की निगाहें रहेंगी।