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Breaking News: जुकरबर्ग ने बाल यौन शोषण सामग्री और डीपफेक कंटेंट के लिए माफी मांगी, भारतीय मंत्री से मुलाकात के बाद बड़ा बयान
🕒 1 hour ago

मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) और डीपफेक कंटेंट के प्रसार को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। यह माफी तब आई जब मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों ने भारत के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, जुकरबर्ग ने स्वीकार किया कि उनके प्लेटफॉर्म पर ऐसी हानिकारक सामग्री को रोकने में गंभीर चूक हुई है, जिसके लिए वे व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदारी लेते हैं। इस बैठक में भारत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही पर कड़ा रुख अपनाया था। जुकरबर्ग ने अपने बयान में कहा कि मेटा के सिस्टम में कई ऑपरेशनल खामियां थीं, जिनका फायदा उठाकर अपराधी बाल यौन शोषण सामग्री और डीपफेक वीडियो प्रसारित कर रहे थे। उन्होंने माना कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉडरेशन टूल्स अपर्याप्त साबित हुए और मानवीय समीक्षा प्रक्रिया में भी देरी हुई। इसके अलावा, एक चौंकाने वाले खुलासे में मेटा ने स्वीकार किया कि कुछ खास तरह के कंटेंट को बूस्ट करने के लिए पैसे लिए गए थे, जिससे हानिकारक सामग्री को अधिक पहुंच मिली। इस रहस्योद्घाटन ने प्लेटफॉर्म की नैतिकता और राजस्व मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत सरकार ने इस मुलाकात में स्पष्ट किया कि नए आईटी नियमों के तहत सोशल मीडिया मध्यस्थों को हानिकारक कंटेंट के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करनी होगी। मंत्री ने चेतावनी दी कि अनुपालन न करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जुकरबर्ग ने आश्वासन दिया कि मेटा भारत में कंटेंट मॉडरेशन टीम को मजबूत करेगा, स्थानीय भाषाओं में समीक्षा क्षमता बढ़ाएगा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग तेज करेगा। साथ ही, डीपफेक पहचान तकनीक में भारी निवेश की घोषणा की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह माफी और स्वीकारोक्ति मेटा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है, लेकिन असली परीक्षा कार्यान्वयन में होगी। बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि केवल माफी काफी नहीं, ठोस कार्रवाई और पारदर्शी रिपोर्टिंग तंत्र स्थापित किए जाएं। डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग को देखते हुए, सरकार से मजबूत नियामक ढांचे की उम्मीद है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर भी सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी पर बहस तेज कर दी है। निष्कर्षतः, जुकरबर्ग की माफी एक सकारात्मक कदम है, लेकिन भारत जैसे विशाल डिजिटल बाजार में उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सतत निगरानी, तकनीकी उन्नयन और कानूनी अनुपालन आवश्यक है। सरकार, नागरिक समाज और तकनीकी कंपनियों को मिलकर ऐसा डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र बनाना होगा जहां बच्चे और कमजोर वर्ग सुरक्षित रहें। आने वाले महीनों में मेटा की कार्रवाइयां ही तय करेंगी कि यह माफी कितनी सार्थक थी।

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✍️ By Pradeep Yadav | 05 Aug 2026