झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रहा छात्र आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। छात्र नेता देवेंद्र महतो पिछले कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे थे, जिनकी हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही थी। इस बीच प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने फोन पर बात करके उनसे अनशन समाप्त करने की मार्मिक अपील की, जिसके बाद देवेंद्र महतो ने जल ग्रहण कर लिया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि उनका अनशन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं करती। सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के माध्यम से देवेंद्र महतो से संवाद करते हुए कहा कि युवाओं का जीवन देश के भविष्य के लिए अमूल्य है और उन्हें जीवित रहकर संघर्ष करना चाहिए। वांगचुक की इस भावुक अपील का असर हुआ और देवेंद्र ने पानी पीकर अपनी जान बचाने का निर्णय लिया। इस घटनाक्रम के बाद आंदोलन को और बल मिला है, क्योंकि पांच और छात्रों ने भी आमरण अनशन में शामिल होने की घोषणा की है। छात्रों का आरोप है कि जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है, जिससे मेहनती और योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि वे केवल परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि परीक्षा परिणामों में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं, कट-ऑफ में मनमाने बदलाव किए गए हैं, और योग्य अभ्यर्थियों को बाहर कर अयोग्य लोगों को चयनित किया गया है। छात्रों ने यह भी बताया कि कई अभ्यर्थी तो ऐसे हैं जिन्हें प्लेटफॉर्म पर सोकर और स्विगी जैसे डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर काम करके अपनी फीस भरनी पड़ी, फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिला। इस स्थिति ने पूरे झारखंड के युवाओं में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस मामले में कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया है, जिससे छात्रों का आक्रोश और बढ़ रहा है। विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है। सोनम वांगचुक के हस्तक्षेप के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द ही उच्चस्तरीय जांच का आदेश नहीं दिया और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को पूरे राज्य में व्यापक रूप दिया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम ने झारखंड की शिक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देवेंद्र महतो का जल ग्रहण करना जहां एक राहत की बात है, वहीं उनका अनशन जारी रखने का संकल्प छात्रों के दृढ़ निश्चय को दर्शाता है। अब गेंद सरकार के पाले में है - देखना होगा कि वह छात्रों की जायज मांगों पर कब और कैसे ध्यान देती है। युवाओं का यह संघर्ष केवल अपने लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था बनाने की लड़ाई है।