लाल सागर में यमन के तटीय जलक्षेत्र में एक भारतीय झंडे वाले मालवाहक जहाज पर अज्ञात प्रक्षेपास्त्र से हमला होने के बाद वह डूब गया, लेकिन राहत की बात यह रही कि चालक दल के सभी 14 सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया। यह घटना उस समय हुई जब जहाज अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजर रहा था और अचानक एक प्रक्षेपास्त्र ने उस पर हमला कर दिया, जिससे जहाज में भीषण आग लग गई और वह धीरे-धीरे डूबने लगा। भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के त्वरित प्रयासों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक गठबंधन की मदद से सभी नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया गया, जिनमें 13 भारतीय नागरिक शामिल हैं। घटना के तुरंत बाद भारतीय विदेश मंत्रालय और नौसेना मुख्यालय ने संयुक्त बयान जारी कर बताया कि जहाज पर सवार सभी 14 चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं और उन्हें निकटतम सुरक्षित बंदरगाह पर पहुंचाया जा रहा है। बचाव अभियान में भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के अलावा अमेरिकी और यूरोपीय नौसैनिक बलों ने भी सहयोग दिया। घटनास्थल पर पहुंचे भारतीय नौसेना के हेलीकॉप्टरों ने नाविकों को जीवनरक्षक नौकाओं से निकालकर युद्धपोतों पर पहुंचाया। प्रारंभिक जांच के अनुसार हमला हूथी विद्रोहियों द्वारा किया गया प्रतीत होता है, जो पिछले कई महीनों से लाल सागर में व्यावसायिक जहाजों को निशाना बना रहे हैं। यह घटना लाल सागर और अदन की खाड़ी में बढ़ते समुद्री खतरों की एक और कड़ी है, जहां पिछले साल से हूथी विद्रोही इजराइल-हमास संघर्ष के समर्थन में व्यावसायिक जहाजों पर हमले कर रहे हैं। भारतीय जहाजों पर यह पहला बड़ा हमला है, जिससे भारतीय व्यापारिक बेड़े की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस जलमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयास तेज करने का आह्वान किया है। नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय नौसेना क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाएगी और व्यावसायिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए एस्कॉर्ट सेवाएं उपलब्ध कराएगी। बचाए गए नाविकों ने बताया कि हमला अचानक हुआ और जहाज के इंजन कक्ष में आग लग गई, जिससे जहाज की गति रुक गई। चालक दल ने तुरंत आपातकालीन प्रक्रियाओं का पालन करते हुए जीवनरक्षक नौकाएं छोड़ीं और संकट कॉल जारी किया। भारतीय नौसेना के प्रवक्ता ने बताया कि ऑपरेशन 'संकल्प' के तहत तैनात युद्धपोतों ने 2 घंटे के भीतर घटनास्थल पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू कर दिया। सभी नाविकों का चिकित्सकीय परीक्षण किया गया है और वे स्वस्थ हैं। जहाज के मालिक कंपनी ने भारत सरकार और नौसेना के त्वरित प्रतिक्रिया की सराहना की है। इस घटना ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार मार्गों की संवेदनशीलता को उजागर किया है, विशेष रूप से लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण जलमार्ग की, जहां से विश्व का लगभग 12 प्रतिशत व्यापार गुजरता है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के समक्ष इस मुद्दे को उठाने का निर्णय लिया है ताकि समुद्री सुरक्षा के लिए एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय ढांचा तैयार किया जा सके। भारतीय नौसेना पहले से ही इस क्षेत्र में ऑपरेशन 'संकल्प' चला रही है और अब तक दर्जनों जहाजों को सुरक्षित मार्गदर्शन प्रदान कर चुकी है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि भारतीय नाविकों और जहाजों की सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे।