📰 Kotputli News
Breaking News: सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: छात्र आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस ले सकेंगे राज्य, अत्यधिक बल प्रयोग करने वाले अधिकारियों पर भी सख्ती
🕒 2 hours ago

उच्चतम न्यायालय ने छात्र आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को लेकर एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकारें कानून के अनुसार छात्र आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) को वापस लेने या बंद करने के लिए स्वतंत्र हैं। यह फैसला विभिन्न राज्यों में छात्र आंदोलनों के दौरान दर्ज हुए सैकड़ों मुकदमों के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। न्यायालय ने यह स्पष्टीकरण उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिया, जिनमें पेपर लीक और अन्य मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की कथित बर्बर कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान एक बेहद संतुलित टिप्पणी करते हुए कहा कि न तो अत्यधिक बल प्रयोग करने वाले अधिकारियों को संरक्षण दिया जाना चाहिए और न ही आपराधिक कृत्य करने वाले प्रदर्शनकारियों को संरक्षण मिलना चाहिए। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि कानून का शासन सर्वोपरि है और दोनों पक्षों को अपनी-अपनी मर्यादा में रहना चाहिए। न्यायालय ने पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग की घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का दुरुपयोग कर हिंसा फैलाने वालों के साथ सख्ती से निपटा जाना चाहिए। न्यायालय ने विभिन्न राज्यों में दर्ज मुकदमों की सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य सरकारों के पास CrPC की धारा 321 के तहत यह अधिकार है कि वे जनहित में मुकदमे वापस ले सकती हैं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि मुकदमे वापस लेने का निर्णय कानून सम्मत प्रक्रिया के तहत ही लिया जाना चाहिए, न कि राजनीतिक दबाव में। विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित इसी तरह के मामलों को देखते हुए उच्चतम न्यायालय ने इस मुद्दे पर एक समान दिशानिर्देश जारी करने के संकेत दिए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए एक समान मापदंड अपनाया जा सके। इस फैसले का असर उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान सहित कई राज्यों में दर्ज सैकड़ों मुकदमों पर पड़ेगा, जहां पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता और अन्य मुद्दों को लेकर छात्रों ने बड़े पैमाने पर आंदोलन किए थे। कई राज्यों में पुलिस ने आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले दागने और बड़ी संख्या में FIR दर्ज करने की कार्रवाई की थी, जिसकी व्यापक आलोचना हुई थी। विभिन्न छात्र संगठनों और नागरिक अधिकार संगठनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की जीत बताया है। न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि मुकदमे वापस लेने का अधिकार राज्य सरकारों का है, लेकिन इसका प्रयोग निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। न्यायालय ने पुलिस सुधारों की आवश्यकता पर भी बल देते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए पुलिस को बेहतर प्रशिक्षण और स्पष्ट दिशानिर्देश दिए जाने चाहिए। इस फैसले को छात्र अधिकारों और पुलिस जवाबदेही दोनों के संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 03 Aug 2026