जंतर मंतर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में अपशब्दों का प्रयोग करने वाली नोएडा की नाबालिग किशोरी की मां ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि उन्होंने उनकी बेटी को क्षमा करके 'नई जिंदगी' दी है। इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किशोरी की उम्र कम होने और प्रधानमंत्री की ओर से किसी भी प्रकार की शिकायत न किए जाने के चलते उसके विरुद्ध कोई मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। पुलिस के इस रुख से परिवार ने राहत की सांस ली है, लेकिन उनकी मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुई हैं। किशोरी की मां ने मीडिया से बातचीत में भावुक होते हुए बताया कि प्रधानमंत्री ने बड़े दिल का परिचय देते हुए उनकी बेटी के कृत्य को नजरअंदाज किया, जिससे उनका पूरा परिवार कृतज्ञ है। उन्होंने इसे 'जीवनदान' की संज्ञा दी और कहा कि प्रधानमंत्री की इस उदारता ने उन्हें एक बड़ा सबक दिया है। वहीं, दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्टि की कि कानूनी प्रक्रिया के तहत नाबालिग होने के कारण और शिकायतकर्ता के अभाव में प्राथमिकी दर्ज करने का कोई आधार नहीं बनता। पुलिस का कहना है कि मामले को संवेदनशीलता से देखा गया है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए समझाइश पर जोर दिया गया है। हालांकि, राहत की इस खबर के बीच परिवार ने एक गंभीर आरोप लगाकर नई चिंता खड़ी कर दी है। किशोरी के परिजनों का दावा है कि घटना के सार्वजनिक होने के बाद से उन्हें लगातार दुष्कर्म और जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। परिवार का आरोप है कि सोशल मीडिया और अज्ञात फोन कॉल्स के माध्यम से उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है, लेकिन पुलिस की ओर से अभी तक इन धमकियों की जांच शुरू नहीं की गई है। परिवार ने अपनी सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। इस पूरे प्रकरण ने एक नाबालिग की गलती, प्रधानमंत्री की उदारता और उसके बाद उपजे सामाजिक विद्वेष के खतरनाक पहलू को उजागर किया है। जहां एक ओर कानून और संवैधानिक पद की मर्यादा ने किशोरी को कानूनी कार्रवाई से बचा लिया, वहीं दूसरी ओर कथित धमकियों ने उसकी और उसके परिवार की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली पुलिस धमकियों के आरोपों पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करती है और परिवार को सुरक्षा का भरोसा दिला पाती है। यह मामला समाज में असहमति जताने के तरीकों और उसके परिणामों पर गंभीर विमर्श की मांग करता है।