बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव की मतगणना सोमवार को होगी, जिस पर पूरे देश की राजनीतिक निगाहें टिकी हुई हैं। बिहार की बांकीपुर, मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मांजलपुर सीटों के नतीजे न केवल स्थानीय समीकरण तय करेंगे, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक दलों की आगे की रणनीति को प्रभावित करेंगे। इन तीनों सीटों पर मतदान पिछले दिनों शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ था और अब सभी दलों के प्रत्याशियों सहित राजनीतिक विश्लेषकों की धड़कनें तेज हैं। बांकीपुर सीट पर मुख्य मुकाबला सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच है, जहां चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की भूमिका भी चर्चा में रही है। वहीं दतिया सीट मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि यहां के नतीजे प्रदेश सरकार की स्थिरता और विपक्ष की ताकत का संकेत देंगे। गुजरात की मांजलपुर सीट पर भी कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है, जहां स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय मुद्दे भी हावी रहे। तीनों सीटों पर मतदान प्रतिशत उत्साहजनक रहा, जिससे साफ है कि मतदाताओं ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई है। मतगणना से ठीक पहले मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने बड़ा कदम उठाते हुए दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में की गई है, जिससे दतिया के राजनीतिक समीकरण में नया मोड़ आ गया है। राजेंद्र भारती पहले भी विवादों में रहे हैं और उनके निलंबन से कांग्रेस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह अनुशासन से समझौता नहीं करेगी। हालांकि, इस फैसले का चुनावी नतीजे पर क्या असर पड़ेगा, यह मतगणना के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। इन उपचुनावों को 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल माना जा रहा है। राजनीतिक दलों ने इन सीटों पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, जिसमें स्टार प्रचारकों से लेकर जमीनी कार्यकर्ताओं तक सभी सक्रिय रहे। प्रशांत किशोर जैसे रणनीतिकारों की उपस्थिति और अशुतोष तिवारी जैसे स्थानीय नेताओं की भूमिका ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। नतीजे न केवल तीन सीटों का भाग्य तय करेंगे, बल्कि तीनों राज्यों में जनता के मूड का भी संकेत देंगे। सोमवार सुबह मतगणना शुरू होते ही तस्वीर साफ होने लगेगी। सभी दलों के कार्यकर्ता मतगणना केंद्रों पर डटे रहेंगे और पल-पल की जानकारी लेते रहेंगे। इन नतीजों से जहां विजयी दल में उत्साह का संचार होगा, वहीं पराजित दल को आत्ममंथन का मौका मिलेगा। लोकतंत्र के इस उत्सव में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है और सोमवार को वही फैसला सामने आएगा, जिसका इंतजार सभी को बेसब्री से है।