पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात जिले में मंगलवार को एक भीषण आत्मघाती हमले ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। आतंकवाद विरोधी शांति रैली के दौरान एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया, जिसमें कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई और 18 से अधिक लोग घायल हो गए। यह हमला स्वात जिले के कबाल इलाके में एक पुलिस थाने के बाहर उस वक्त हुआ जब स्थानीय नागरिक और कबायली नेता आतंकवाद के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। मरने वालों में पुलिसकर्मी, कबायली बुजुर्ग और आम नागरिक शामिल हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, हमलावर रैली में शामिल होने का दिखावा करते हुए भीड़ में घुसा और फिर विस्फोटकों से लदी जैकेट को उड़ा दिया। धमाका इतना जबरदस्त था कि आसपास की इमारतों के शीशे टूट गए और घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई की हालत गंभीर बनी हुई है। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है और जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) पर इस हमले का शक जताया जा रहा है, हालांकि अभी तक किसी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है। स्वात घाटी, जो कभी पर्यटन के लिए प्रसिद्ध थी, पिछले कुछ वर्षों से आतंकवाद की चपेट में है। स्थानीय निवासी लंबे समय से शांति और सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। इसी क्रम में मंगलवार को कबाल में 'अमन जिरगा' (शांति सभा) का आयोजन किया गया था, जिसमें सैकड़ों कबायली नेता, स्थानीय राजनेता और नागरिक शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारी आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई और क्षेत्र में शांति बहाली की मांग कर रहे थे। यह विडंबना ही है कि शांति की मांग करने वाली रैली ही आतंक का निशाना बन गई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। प्रधानमंत्री ने इसे 'कायरतापूर्ण कृत्य' करार देते हुए कहा कि शांति चाहने वालों का खून बेकार नहीं जाएगा। सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है। सेना ने भी आतंकवादियों के खिलाफ अभियान तेज करने का संकल्प दोहराया है। इस हमले ने एक बार फिर पाकिस्तान में आतंकवाद के पुनरुत्थान की भयावह तस्वीर पेश की है। खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में हाल के महीनों में आतंकी घटनाओं में तेजी आई है। स्थानीय लोग डरे हुए हैं लेकिन साथ ही आतंक के खिलाफ आवाज उठाने का संकल्प भी दोहरा रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि शांति रैली पर हमला आतंकवादियों की हताशा दर्शाता है, जो जनसमर्थन खो चुके हैं। अब देखना होगा कि सरकार और सुरक्षा बल इस चुनौती से कैसे निपटते हैं और स्वात घाटी में फिर से अमन कायम हो पाता है या नहीं।