केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद नीट-पीजी 2026 के लिए छात्र-हितैषी सुधारों की घोषणा की गई है। इन परिवर्तनों का उद्देश्य परीक्षा को सुगम, सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। सरकार ने मेडिकल स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए होने वाली इस महत्वपूर्ण परीक्षा की संरचना में आधारभूत बदलाव किए हैं, जिससे लाखों अभ्यर्थियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव परीक्षा अवधि और प्रश्न हल करने के समय में वृद्धि है। अब अभ्यर्थियों को प्रत्येक प्रश्न के लिए अधिक समय दिया जाएगा, जिससे वे तनावमुक्त होकर अपनी योग्यता का बेहतर प्रदर्शन कर सकें। इसके साथ ही परीक्षा केंद्रों के विकल्प बढ़ा दिए गए हैं और इन्हें अभ्यर्थियों के निवास स्थान के निकट आवंटित करने की नीति अपनाई गई है। 'द हिंदू' की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रों की बढ़ी हुई संख्या और विकल्प छात्रों की यात्रा संबंधी परेशानियों को काफी हद तक कम कर देंगे। परीक्षा की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इस बार आधार और आइरिस (आईरिस) आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य किया गया है। 'टाइम्स ऑफ इंडिया' के अनुसार, यह कदम प्रतिरूपण (इम्परसनेशन) और नकल जैसी अनियमितताओं को पूरी तरह रोकने में कारगर साबित होगा। पीआईबी की विज्ञप्ति में मंत्री नड्डा ने जोर देकर कहा कि ये सुधार छात्रों के हित को केंद्र में रखकर किए गए हैं, ताकि वे बिना किसी तकनीकी या लॉजिस्टिक बाधा के परीक्षा दे सकें। उधर, स्नातक स्तर पर भी प्रक्रिया तेज कर दी गई है। 'टेलीग्राफ इंडिया' के मुताबिक, नीट-यूजी की काउंसलिंग आगामी 4 अगस्त से शुरू होगी और नया शैक्षणिक सत्र 8 सितंबर से प्रारंभ होने का प्रस्ताव है। इस समयबद्ध कार्यक्रम से मेडिकल कॉलेजों में सीट आवंटन और प्रवेश प्रक्रिया में देरी नहीं होगी, जिससे शैक्षणिक कैलेंडर पटरी पर रहेगा। कुल मिलाकर, नीट-पीजी 2026 के ये सुधार भारतीय चिकित्सा शिक्षा प्रणाली में एक प्रगतिशील कदम हैं। अधिक समय, सुलभ केंद्र और फूलप्रूफ सुरक्षा व्यवस्था न केवल परीक्षा की विश्वसनीयता बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीण और दूरदराज के छात्रों के लिए समान अवसर भी सुनिश्चित करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से परीक्षा का तनाव कम होगा और वास्तविक मेधा को सामने आने का पूरा मौका मिलेगा।