इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में शनिवार को एक यात्री नौका में भीषण आग लगने से कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि 41 अन्य लापता बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, केएम लादी जया नामक यह नौका लारंटुका बंदरगाह से लेवोलागा की ओर जा रही थी, तभी अचानक इंजन कक्ष में आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने पूरी नौका को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। कई यात्रियों ने जान बचाने के लिए समुद्र में छलांग लगा दी, लेकिन तेज लहरों और आग की लपटों के कारण कई लोग लापता हो गए। बचाव दल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अब तक 52 यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया है, जिनमें से कुछ गंभीर रूप से झुलसे हुए हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। इंडोनेशिया की राष्ट्रीय खोज एवं बचाव एजेंसी (बसरनस) के प्रमुख ने बताया कि खोज अभियान में नौसेना, तटरक्षक बल और स्थानीय मछुआरों की नौकाओं को लगाया गया है। हालांकि, खराब मौसम और ऊंची लहरों के कारण बचाव कार्य में बाधा आ रही है। अधिकारियों को आशंका है कि लापता लोगों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि नौका की यात्री सूची में दर्ज नामों और वास्तविक यात्रियों की संख्या में अंतर हो सकता है। परिवहन मंत्रालय ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं और नौका के कप्तान तथा चालक दल के सदस्यों से पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण इंजन कक्ष में शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, लेकिन आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार है। इंडोनेशिया में नौका हादसे आम बात हैं, जहां द्वीपसमूह राष्ट्र में लाखों लोग रोजाना समुद्री परिवहन पर निर्भर हैं। सुरक्षा मानकों की अनदेखी, ओवरलोडिंग और पुराने जहाजों का संचालन ऐसी दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण रहे हैं। सरकार ने हाल के वर्षों में समुद्री सुरक्षा नियमों को सख्त करने का दावा किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर अमल अभी भी चुनौती बना हुआ है। राष्ट्रपति जोको विडोडो ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई है और संबंधित एजेंसियों को बचाव कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया है। स्थानीय प्रशासन ने लापता लोगों के परिजनों के लिए सहायता केंद्र स्थापित किए हैं, जहां उन्हें भोजन, आश्रय और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान की जा रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी इंडोनेशिया के प्रति एकजुटता व्यक्त की है। यह त्रासदी एक बार फिर समुद्री परिवहन में सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है, ताकि भविष्य में ऐसी हृदयविदारक घटनाओं को रोका जा सके।