सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता ने सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके के पिता की आय और उनके अमेरिका में शिक्षा के खर्च को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। कार्यकर्ता ने संबंधित अधिकारियों से इस मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। यह मामला तब सामने आया जब अभिजीत दीपके के पिता की कथित वेतन राशि और उनके पुत्र की विदेशी शिक्षा पर होने वाले भारी-भरकम खर्च के बीच बड़ा अंतर नजर आया। इस प्रकरण ने पारदर्शिता और आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति के मामलों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अभिजीत दीपके के पिता एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी रहे हैं और उनका मासिक वेतन लगभग 60,000 रुपये बताया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि सामान्य वेतन वाले व्यक्ति ने अपने पुत्र को अमेरिका जैसे महंगे देश में उच्च शिक्षा के लिए कैसे भेजा? अमेरिका में शिक्षा, आवास और जीवन-यापन का वार्षिक खर्च करोड़ों रुपये में होता है। आरटीआई कार्यकर्ता ने इस विसंगति को इंगित करते हुए आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय और अन्य संबंधित एजेंसियों से इस वित्तीय लेन-देन की गहन छानबीन करने का आग्रह किया है। अभिजीत दीपके 'कॉकरोच जनता पार्टी' नामक संगठन से जुड़े हुए हैं और सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहे हैं। उनके पिता की आय को लेकर उठे इस विवाद ने उनके संगठन के वित्तपोषण पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। कार्यकर्ता ने मांग की है कि केवल अभिजीत की शिक्षा ही नहीं, बल्कि उनके परिवार और संबंधित संगठन के वित्तीय स्रोतों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इस मामले में अभी तक अभिजीत दीपके या उनके परिवार की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है, जिससे अटकलों का बाजार गर्म है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति या अघोषित आय का पता चलता है, तो यह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और काले धन संबंधी कानूनों के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा। आरटीआई कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह के मामले सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। सरकारी एजेंसियों को चाहिए कि वे बिना किसी दबाव के तथ्य-आधारित जांच करें और दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें। इस प्रकरण ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि आरटीआई कानून नागरिकों को सशक्त बनाने और शासन में पारदर्शिता लाने का सशक्त माध्यम है। अब सबकी निगाहें जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह न केवल संबंधित व्यक्तियों बल्कि सार्वजनिक जीवन में नैतिक मानदंडों के लिए भी एक बड़ा सबक होगा। समाज को ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और त्वरित न्याय की अपेक्षा रहती है, ताकि कानून का शासन स्थापित रहे और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लग सके।