जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में शनिवार को हुए एक भीषण आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की निर्मम हत्या कर दी गई। यह घटना एक बार फिर घाटी में गैर-स्थानीय श्रमिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मारे गए मजदूरों की पहचान छत्तीसगढ़ के निवासियों के रूप में हुई है, जो रोजी-रोटी की तलाश में कश्मीर आए थे। सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है, जबकि इस हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी संगठन ने नहीं ली है, मगर खुफिया सूत्रों का इशारा लश्कर-ए-तैयबा के एक स्थानीय कमांडर और उसके सहयोगी की ओर है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आतंकियों ने हमले से पहले मजदूरों से उनकी पहचान पूछी और फिर उन्हें अलग कर गोली मार दी। यह तरीका बिल्कुल वैसा ही है जैसा कुछ महीने पहले पहलगाम में हुए हमले में अपनाया गया था, जहां पर्यटकों को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया था। इस 'पहलगाम जैसे पैटर्न' ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह दर्शाता है कि आतंकी अब गैर-स्थानीय लोगों, विशेषकर हिंदू श्रमिकों को चुन-चुन कर निशाना बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए केंद्र सरकार की सुरक्षा नीतियों पर सवाल उठाए हैं और कहा कि मजदूरों को पहचान पूछकर मारा गया, जो बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। पुलिस और सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हमलावर दो से तीन की संख्या में थे और वे हमले के बाद पास के जंगलों की ओर भाग निकले। सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीमें इलाके में बड़े पैमाने पर कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन (कासो) चला रही हैं। ड्रोन और खोजी कुत्तों की मदद भी ली जा रही है। प्रशासन ने प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं, साथ ही उनके रहने वाले शिविरों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इस हमले ने एक बार फिर कश्मीर में सामान्य जनजीवन और आर्थिक गतिविधियों को पटरी पर लाने की कोशिशों को झटका दिया है। हर साल हजारों की संख्या में देश के विभिन्न राज्यों से मजदूर कश्मीर में निर्माण कार्य, सेब के बागानों और अन्य क्षेत्रों में काम करने आते हैं। ऐसी घटनाएं न केवल उनके मन में भय पैदा करती हैं, बल्कि घाटी की अर्थव्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर डालती हैं। केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों को जल्द से जल्द न्याय के कटघरे में खड़ा करने का संकल्प दोहराया है और मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे का ऐलान किया है। निष्कर्षतः, कुलगाम का यह आतंकी हमला सीमापार से प्रायोजित आतंकवाद के उस घिनौने चेहरे को उजागर करता है जो निर्दोष, गरीब और मेहनतकश लोगों को अपना निशाना बनाता है। सुरक्षा बलों को न केवल आतंकियों का सफाया करना होगा, बल्कि उस खुफिया तंत्र को भी मजबूत करना होगा जो ऐसे हमलों की पूर्व सूचना दे सके। साथ ही, प्रवासी श्रमिकों के लिए एक सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि कश्मीर में अमन और विकास की गति बाधित न हो।